महराजगंज। बिजली विभाग की ओर से जिस फर्म को मीटर बदलने के लिए ठेका दिया गया, उसने ही चूना लगा दिया है। अधीक्षण अभियंता ने फर्म को काली सूची में डाल दिया है। अब मामले की जांच शुरू हो गई है। विभाग की ओर से सदर कोतवाली में तहरीर दी गई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
सहायक अभियंता मीटर राजेश कुमार की ओर से कोतवाली में दी गई तहरीर के अनुसार, उपभोक्ताओं के खराब (आईडीएफ) मीटर बदलने का अनुबंध परशुराम जायसवाल ग्राम पड़री खुर्द, पोस्ट करमहा, महराजगंज के साथ हुआ है। अनुबंध के तहत उपभोक्ताओं के खराब मीटरों को नए मीटरों से बदलने के लिए विद्युत परीक्षण खंड महराजगंज की ओर से सूची कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि परशुराम जायसवाल को समय-समय पर उपलब्ध करायी गई।
परशुराम जायसवाल की ओर से उपभोक्ताओं के खराब मीटर न बदलकर धन उगाही करते हुए उपभोक्ताओं के सही मीटर बदल दिए गए हैं। अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम ने डिस्काम मुख्यालय से आईडीएफ (खराब) मीटरों के प्रकरणों की प्राप्त सूची के विश्लेषण में पाया कि परशुराम जायसवाल ने अनुबंध के तहत माह जनवरी 2024 में 408 मीटर बदले, लेकिन उनमें से 100 उपभोक्ताओं का दिसंबर 2023 में मीटर आधारित बिल निर्गत हो रहा था। जिनके मीटर सही थे।
परशुराम जायसवाल ने जनवरी 2024 में 100 उपभोक्ताओं के सही मीटर बदलकर विभाग को 200 मीटर के मूल्य के समतुल्य राजस्व 2,05,792 रुपये एवं उपभोक्ताओं के परिसर से उतारे गए सही मीटरों में अंकित रीडिंग के राजस्व निर्धारण कर वसूली के लिए परीक्षण खंड द्वारा अलग से प्रेषित किया जाएगा। अधीक्षण अभियंता विद्युत एक अप्रैल को प्रेषित पत्र में कार्यदायी संस्था को अपना पक्ष रखने के लिए निर्देशित किया गया, लेकिन कोई प्रतिवेदन प्रेषित नहीं किया गया।
सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक राहुल शुक्ला ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। तथ्य सामने आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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70 से अधिक लोगों ने दर्ज कराई शिकायत
आरोप है कि फर्म के प्रतिनिधियों ने 2000 से लेकर 2500 रुपये मीटर बदलने के एवज में वसूली की। अधीक्षण अभियंता का कहना है कि 70 से अधिक लोगों ने शिकायत दर्ज कराई जिसका जवाब फर्म नहीं दे सकी। इसलिए कार्रवाई की गई है। पहले चरण में एक हजार से अधिक मीटर बदले गए व नये उपभोक्ताओं के घर मीटर भी लगवाए, लेकिन धन उगाही करने वाले एजेंटों ने विभाग का नाम खराब कर दिया।
मेसर्स परशुराम को ठेका दिया गया था, जिनके खिलाफ शिकायत मिली। संतोषजनक जवाब न मिलने पर फर्म को काली सूची में डाल दिया गया है। केस दर्ज करने के लिए सदर कोतवाली में तहरीर दी गई है।
-वाईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता