महराजगंज। मंगलवार को कोहरे और बादलों की अधिकता से पूरे दिन धुंध छाई रही। दृश्यता ग्राफ निचले पायदान पर गोता लगाता रहा। 15 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चली बर्फीली हवा ने लोगों को कांपने पर मजबूर कर दिया। न्यूनतम तापमान जहां 7 डिग्री रिकॉर्ड हुआ वहीं अधिकतम 17 डिग्री रहा।
2024 का आखिरी दिन लोगों के जेहन में कुछ समय तक बना रहेगा कि किस तरह ठंड से कांपते हुए पुराने साल की विदाई और नये साल का स्वागत किया गया था। साल के आखिरी दिन न्यूनतम तापमान पिछले दिनों से एक पायदान और नीचे चला गया। हालांकि सोमवार रात 11 बजे के बाद आसमान पूरी तरह साफ और तारों भरी देखकर अनुमान था कि सुबह धूप खिलेगी और ठंड कम होगी, लेकिन सुबह तीन बजे के बाद से पुरवा हवा दोबारा डोलने लगी और कोहरे का दायरा बढ़ने लगा। सुबह होते होते बादलों ने भी डेरा डाल दिया।
सुबह लगभग नौ बजे तक कोहरे और बादलों की जुगलबंदी के कारण कोहरा छाए रहने से दृश्यता कम रही। सड़क पर वाहन धीमी गति से चलते नजर आए। 11 बजे के बाद दृश्यता का ग्राफ जरूर बढ़ा, लेकिन तेज हवा ने रफ्तार नहीं बढ़ने दिया। शाम तीन बजे के बाद फिर से बादलों के बढ़ने से धुंध की स्थिति बढ़ती गई। बाहर निकलने वालों को टोपी, मफलर, इनर, स्वैटर, जैकेट और दस्तानों को पहनने के बाद भी राहत नहीं मिली और भीतर से उन्हें कंपकंपी महसूस होती रही। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी क्षेत्रों में भी लोग अलाव से उठने का साहस नहीं जुटा सके। बुजुर्ग और छोटे बच्चे पूरे दिन रजाई और बिस्तर में जमे रहे।
ओपीडी में सर्दी के पहुंचे अधिक मरीज
जिला अस्पताल की ओपीडी में भी ठंड का असर दिखा। कोई ठंड लगन से उल्टी दस्त तो कोई लगातार आ रही छींक और खांसी से सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचा। गृहणियों की संख्या 23 रही जिनके पैरों में और उंगलियों में सूजन की शिकायत आ गई थी। चिकित्सकों ने सरसों का तेल लगाकर सूजन वाले हिस्से की सिंकाई करने की सलाह दी। बुखार पीड़ित और हड्डियों के दर्द से परेशान लोगों की संख्या भी अधिक रही। ओपीडी में 764 मरीजों का उपचार किया गया और ठंड से बचाव की हिदायत दी गई। सीएमएस डाॅ. एपी भार्गव ने बताया कि ओपीडी में रूम हीटर के पर्याप्त प्रबंध के साथ परिसर में अलाव का प्रबंध भी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दवाएं दी गईं।