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Maharajganj News: पर्याप्त यूरिया भंडारण का दावा...वितरण में सतर्कता

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महराजगंज। जिले में इस बार रबी सीजन के दौरान डाई (डीएपी) और यूरिया पर्याप्त व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम करने का दावा किया है।
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प्रशासन का कहना है कि उर्वरक वितरण को पारदर्शी, सुव्यवस्थित और डिजिटल प्रणाली से जोड़ा गया है। ताकि वास्तविक किसानों को ही खाद मिले और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। जिले में करीब 20,000 मीट्रिक टन यूरिया और 15,936 मीट्रिक टन डीएपी, एनपीके, एमओपी, एसएसपी का भंडारण किया गया है।
जानकारी के अनुसार, जिले की 96 साधन सहकारी समितियों पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी समितियों में टोकन प्रणाली लागू की गई है ताकि अनावश्यक भीड़ और अफरा-तफरी की स्थिति न बने। प्रशासन ने दावा किया है कि पर्याप्त मात्रा में उर्वरक होने के कारण किसी भी किसान को खाद की कमी नहीं होगी। धान सीजन में आई खाद संकट की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शासन ने बी पैक्स सदस्यता अभियान शुरू किया है। 30,000 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 60,000 किसान समिति के सदस्य बनाए जा चुके हैं। अब समिति से खाद वही किसान प्राप्त कर सकेंगे जो सदस्यता ले चुके हैं या जिनके पास वैध फार्मर आईडी (किसान पंजीकरण) है।
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समिति सदस्यता और फार्मर आईडी अनिवार्य : सहकारिता विभाग ने नियम स्पष्ट किया है कि अब समिति से खाद वही किसान ले सकेगा जो या तो समिति का सदस्य है या उसके पास फार्मर रजिस्ट्री (किसान आईडी) है। यदि किसी किसान के पास सदस्यता या फार्मर आईडी नहीं है तो उसे बाजार से ही खाद खरीदनी होगी। यह नियम इसलिए लागू किया गया है ताकि उर्वरक केवल पात्र किसानों तक ही पहुंचे और अवैध बिक्री पर अंकुश लगे।
खाद वितरण में बदले नियम, बढ़ा पंजीकरण : शासन ने हाल ही में खाद वितरण संबंधी नियमों में बदलाव किए हैं। अब समिति सदस्यता और फार्मर रजिस्ट्री दोनों आवश्यक हैं। नई व्यवस्था लागू होते ही जिलेभर में बड़ी संख्या में किसान जनसेवा केंद्रों और समितियों पर पंजीकरण कराने पहुंच रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस बार किसानों का रुझान ऑनलाइन सदस्यता की ओर तेजी से बढ़ा है।
प्रति हेक्टेयर तय की गई खाद की सीमा : खाद वितरण में समानता बनाए रखने के लिए विभाग ने प्रति हेक्टेयर खाद की सीमा तय कर दी है। प्रति हेक्टेयर एक बोरी डीएपी और दो बोरी यूरिया ही किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।
सहकारिता विभाग का कहना है कि इस सीमा का उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समितियों पर वितरण की पूरी मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि कोई भी किसान सीमा से अधिक खाद न ले सके।
ऑनलाइन मॉनिटरिंग से होगी पारदर्शिता सुनिश्चित : प्रशासन ने खाद वितरण की निगरानी के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया है। हर समिति में उर्वरक स्टॉक और बिक्री का रियल-टाइम डेटा दर्ज किया जा रहा है। इससे किसी भी स्तर पर अनियमितता या कालाबाजारी की संभावना खत्म होगी। यदि किसी समिति में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसका लाइसेंस निलंबित करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
कृषि विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश : कृषि विभाग ने सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि किसानों को उनकी जोत बही के अनुसार ही खाद दी जाए। निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूलने, किसी अन्य उत्पाद की टैगिंग करने या बिना कैश रसीद दिए उर्वरक बेचने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे जोत के अनुसार ही उर्वरक लें और अनावश्यक भंडारण से बचें।
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रबी सीजन की तैयारी में जुटे किसान : धान की कटाई के साथ ही किसान अब गेहूं, सरसों और आलू की बुआई की तैयारी में जुट गए हैं। कई किसानों ने समय से पहले ही धान की कटाई पूरी कर ली है और अब वे रबी फसल की बुआई शुरू कर चुके हैं। ग्राम बैदा के किसान बालगोविंद गुप्ता ने बताया कि आलू की बुआई करनी थी इसलिए समिति में खाद लेने गए लेकिन ऑनलाइन सदस्यता न होने के कारण खाद नहीं मिली। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली से प्रक्रिया थोड़ी सख्त जरूर हुई है लेकिन इससे यह सुनिश्चित होगा कि खाद असली किसानों तक पहुंचे।
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