जिला अस्पताल में रोज पहुंच रहे डायरिया, उल्टी-दस्त और पेट दर्द से पीड़ित बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। मौसम में बदलाव और फास्ट फूड खाने से बच्चे डायरिया, पेट में इंफेक्शन व उल्टी-दस्त से पीड़ित हो रहे हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों चाउमीन न खिलाएं और न ही दूषित स्थानों पर जूस व पानी पीने दें।
डॉक्टरों के अनुसार, तापमान बढ़ने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इससे पेट से जुड़ी बीमारियां होने लगती हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 700 से अधिक की ओपीडी होती है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में मरीजों की भीड़ रहती है। बच्चों के पेट से जुड़ी बीमारियां अधिक आ रही हैं। एक डॉक्टर के पास 10 से 15 मरीज प्रतिदिन इलाज कराने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में बच्चे को इलाज कराने आए मनोहर ने बताया कि दो साल का बच्चा है। रात में रोने लगा, कई बार उल्टी कर चुका है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि बच्चों में डायरिया के साथ उल्टी-दस्त के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। शरीर में पानी कम होने पर यह बीमारियां होती है। ओपीडी में गंभीर मरीज मिलने पर भर्ती किया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को चाउमिन या दूषित जगहों पर जूस या पेय पदार्थ न पिलाएं। इससे बच्चों के पेट में इंफेक्शन होने का डर रहता है। धूप से बच्चों को बचाएं। अगर निकलते हैं तो सर ढक लें। खूब पानी पिलाएं। सीएमएस डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि धूप अधिक होने से मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
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गर्मी में प्यास बुझाने के लिए बाजार में सजे मटका और सुराही
महराजगंज। गर्मी बढ़ने से लोगों का गला सूखने लगा है। ऐसे में फ्रिज का ठंडा पानी आपको बीमार बना सकता है। देसी फ्रिज यानी मिट्टी के मटके का पानी आपको बीमारी से बचा सकता है।
शहर में परंपरागत मिट्टी के मटकों में भी वैरायटी आ चुकी है। अन्य प्रदेशों से आने वाले मटके हर किसी को लुभा रहे हैं। विक्रेताओं का दावा है कि इन मटकों में पानी ज्यादा ठंडा होता हैं। शहर का चिउरहां मार्ग मटकों से सज गए हैं। दुकान पर छोटे मटके की कीमत 250 रुपये तो टोटी वाले बड़े मटके 450 रुपये बिक रहे हैं। संवाद
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घर में ही पानी करें फिल्टर
आयुष अनुभाग के डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि मटके में सादा पानी डाला जाए तो बेहतर है। फिल्टर पानी में मिनरल्स आदि तत्व बहुत कम रह जाते हैं। पानी को प्राकृतिक रूप से फिल्टर करने के लिए एक के ऊपर एक या दो मटके रखने चाहिए। पहले मटके के तले में छोटा छेद करके इसमें बालू या कंकड़ डाल दीजिए। उसके नीचे वाले मटके में पतला कपड़ा या छननी लगा देना चाहिए। इसके बाद ऊपर वाले मटके में पानी डाला जाय तो यह प्रकृति रूप से फिल्टर होगा। यह पानी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद है।