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Maharajganj News: आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब एलईडी टीवी से बच्चे करेंगे पढ़ाईे

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महराजगंज। अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर छोटे बच्चे किताबों के बजाय एलईडी स्क्रीन के माध्यम से खेल-खेल में पढ़ना सीखेंगे। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की इस नई पहल से जिले के नन्हें बच्चों को प्री-प्राइमरी स्तर पर आधुनिक तकनीक से शिक्षा देने की शुरुआत होने जा रही है।
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शासन की ओर से जिले के 398 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए एलईडी टीवी भेजी जा रही हैं, जिन पर डिजिटल तरीके से शिक्षण सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के तहत जिले में कुल 3,164 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इसमें तीन से छह वर्ष तक की आयु वर्ग के हजारों बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्रों पर अब शिक्षण का तरीका बदला जा रहा है।
शासन की व्यवस्था के तहत केंद्रों को प्री-प्राइमरी शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को प्राथमिक विद्यालय जाने से पहले ही खेल-खेल में अक्षर, अंक और रंगों की पहचान जैसी बुनियादी शिक्षा मिल सके। इस पहल के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। फिलहाल पहले चरण में उन्हीं केंद्रों को चुना गया है जो अपने स्वामित्व वाले भवनों में संचालित हैं और जहां बिजली, पानी की व्यवस्था तथा पोषण वाटिका मौजूद है।
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ऐसे सक्षम केंद्रों की सूची बनाकर कुल 398 केंद्रों का चयन किया गया है। इसके सापेक्ष 279 केंद्रों पर एलईडी टीवी की आपूर्ति हो चुकी है। कार्यदायी संस्था की ओर से इन टीवी को लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।लेकिन अभी भी 119 केंद्र ऐसे हैं, जहां कार्यदायी संस्था द्वारा सर्वे का काम शुरू नहीं किया गया है। इस वजह से इन केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को फिलहाल एलईडी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विभाग के अनुसार, संबंधित कार्यदायी संस्था को इस संबंध में पत्र भेजकर शीघ्र कार्य प्रारंभ करने का निर्देश दिया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि सभी चयनित केंद्रों पर एलईडी स्क्रीन की स्थापना जल्द से जल्द पूरी की जाए, ताकि बच्चों को बिना देरी के नई शिक्षण व्यवस्था का लाभ मिल सके।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एलईडी आधारित शिक्षण प्रणाली से बच्चों में सीखने की रुचि और भागीदारी दोनों बढ़ेंगी। ऑडियो-वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत की जाने वाली सामग्री से बच्चे आसानी से अक्षरों, संख्याओं, रंगों और आकारों को पहचानना सीखेंगे। इससे न केवल बच्चों का बौद्धिक विकास होगा बल्कि उनकी भाषा और अभिव्यक्ति क्षमता भी सशक्त होगी।
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