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Maharajganj News: परिषदीय विद्यालयों में पुरानी किताबों से बच्चे कर रहे पढ़ाई

Tue, 16 Apr 2024 04:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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विद्यालय खुलने के पंद्रह दिन बाद भी स्कूलों पर नहीं पहुंचे किताब
संवाद न्यूज एजेंसी
फरेंदा। परिषदीय विद्यालयों की पढ़ाई राम भरोसे है। विद्यालय खुलने के 15 दिन बाद भी अभी तक किताब नहीं पहुंची है। बच्चे पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं। शासन से किताब भेजने का फरमान पहले ही जारी हो चुका है। इसके बावजूद भी किताब नहीं आई। शिक्षक विद्यालय पर पहुंचकर बच्चों को वही पुरानी किताब से फिर से पढ़ा रहे हैं। इसको लेकर अभिभावकों में नाराजगी है। सरकार कान्वेंट की तर्ज पर शिक्षा देने की बात कर रही है। फरेंदा क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के पड़ताल पर किताब न पहुंचने की बात सामने आई।
प्राथमिक विद्यालय गोपलापुर में पंजीकृत छात्र 156 हैं, जबकि 90 छात्र ही उपस्थित रहे। बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे। उनको शिक्षक भीमसेन गौतम पढ़ा रहे थे। पूछने पर पता चला कि बच्चों को अभी तक नई किताबें शासन से नहीं मिल सकी है। बच्चे पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं।
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प्राथमिक विद्यालय सेमराड़ाड़ी में कुल पंजीकृत छात्रों की संख्या 153 है। जहां पर चार शिक्षक छात्रों को शिक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। पढ़ा रहे शिक्षक सुशील कुमार शाही ने बताया कि छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। गांव में भ्रमण कर लोगों को अपने बच्चों का नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शासन से नई किताब न आने के कारण छात्रों को मजबूरी में पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कराया जा रहा है।

कंपोजिट विद्यालय भगवतनगर परसिया में कुल पंजीकृत छात्रों की संख्या 223 हैं। सोमवार को 187 छात्र उपस्थित रहे। कक्षा में प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार गौड़ कक्षा तीन के छात्रों को पढ़ा रहे थे। कक्षा में पढ़ाई कर रहे छात्र अभय, आरती, रजनी प्रभा, आयुष, अनुष्का व नीरज ने बताया कि अभी तक नई किताबें नहीं आई हैं। पुरानी किताबों से ही पढ़ाई किया जा रहा है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि जल्द किताबें आने की उम्मीद है।
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जिले में नई किताबें पहुंच चुकी हैं। वहां से ब्लाॅक स्तर पर जल्द आने की उम्मीद है। जैसे ही किताब ब्लाॅक पर पहुंचती है विद्यालयों को वितरित कर दी जाएगी। एक दो दिन में आने की उम्मीद है।
-अगनित कुमार, खंड शिक्षाधिकारी, फरेंदा
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