सीमावर्ती क्षेत्र के सैंकड़ों मजदूर नेपाल में काम करने जाते थे, फैक्टरी बंद होने से परेशान हैं मजदूर
बचे हुए उद्योगों में 20 से 40 प्रतिशत क्षमता में हो रहा है उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल के रूपनदेही जिले की 12 से अधिक सीमेंट फैक्टरियां बंद हो गई हैं, जो चल रही हैं उनमें आधे से कम का उत्पादन हो रहा है। फैक्टरियों के बंद होने से भारतीय क्षेत्र के सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। 100 से अधिक मजदूर काम से हटा दिए गए हैं, उनको परेशानी हो रही है। वह अब अपने क्षेत्र में काम की तलाश में जुटे हैं।
जानकारी के अनुसार, रूपनदेही के भैरहवा-लुंबिनी सड़क खंड पर दर्जनों बड़े उद्योग हैं। यहां दो दर्जन से अधिक लघु उद्योग हैं। इस कॉरिडोर के आधे बड़े उद्योगों ने उत्पादन बंद कर दिया है, जबकि शेष उद्योग अपनी क्षमता का केवल 20-40 प्रतिशत ही उत्पादन कर रहे हैं। नेपाल से लगी 84 किमी सीमा के करीब बसे लगभग हर गांव से मजदूर नेपाल में मजदूरी करने फैक्ट्री में आते थे। अब इनकी संख्या कम हो गई। सिद्धार्थ सीमेंट उद्योग के प्रबंध निदेशक रोहित कुमार अग्रवाल ने बताया कि बिक्री करीब ठप हो गई है। मेरे जैसे कई उद्योगपति संकट में हैं, क्योंकि बाजार में काम नहीं है। करीब 40 फीसदी क्षमता पर इंडस्ट्री चल रही है।
लुंबिनी कॉरिडोर में गोयनका, रिलांयस सीमेंट उद्योग भी बंद हो गए हैं। इस कॉरिडोर में नेपाल अंबुजा सीमेंट, बृज सीमेंट इंडस्ट्रीज, जगदंबा सीमेंट, पाठक सीमेंट, सुप्रीम सीमेंट अपनी क्षमता का आधा भी उत्पादन नहीं कर रहे हैं। अर्गाखांची सीमेंट और अंबे स्टील्स भी अपनी क्षमता का केवल आधा उत्पादन कर रहे हैं। अर्गाखांची सीमेंट के निदेशक राजेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि अगले 6 महीने तक देश की आर्थिक स्थिति ऐसी ही रहने की आशंका है। बैंक ब्याज माफ नहीं करते, कुछ समय नहीं देते। सरकार इसमें सुविधा नहीं देती, न ही उद्योगपतियों को राहत देती है, देश की आर्थिक स्थिति कहां जाएगी।
सिद्धार्थ उद्योग व्यापारी संघ के अध्यक्ष ठाकुर कुमार श्रेष्ठ ने कहा कि आज की जो स्थिति है उसमें निजी क्षेत्र डूब रहे हैं। इसलिए सरकार को पहले उद्योगपतियों को बचाना होगा।
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10 हजार से अधिक लोग हुए बेरोजगार
सीमावर्ती नेपाली फैक्ट्रियों के बंद होने से करीब 10 हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं। इनमें आधे से अधिक भारतीय नागरिक हैं, जो पिछले कई वर्षों से इन औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहे थे। सोनौली निवासी संजीवन ने बताया कि 55000 सैलरी थी। मेरे जैसे सेल्स मेन, वर्कर, गोडाउन इंचार्ज ऑफिस स्टाफ मजदूर लगभग सभी भारतीय थे। गोरखपुर, बृजमनगंज, बिहार, दिल्ली, हरियाणा सहित भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग यहां काम करते थे। भैरहवा निवासी शाकिर, उत्तम, विनोद ने बताया कि सिर्फ कॉरिडोर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि भैरहवा, बुटवल जैसे बड़े शहरी इलाकों की स्थिति और वहां संचालित होने वाले कारोबार की कहानी भी यही है।
नेपाल के उद्योग बंद होने से काफी प्रभाव पड़ा है। भारत एवं नेपाल के करीब 10 हजार लोग प्रभावित हुए है। जिनमें हम लोग भी हैं। उद्योग के बंद होने से कच्चा पदार्थ सहित मशीन पार्ट पुर्जे भी आने बंद हो गए हैं। भारत के कई ट्रांसपोर्ट बंद हो गए है। माल ढुलाई करने वाले करीब 50 वाहन खड़े हो गए हैं।
रतन गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष, नेपाल भंसार एजेंट
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नेपाली औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से भारत से जाने वाले उक्त औद्योगिक संस्थानों के लिए औद्योगिक कच्चा पदार्थ कोयला का एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है। सीमेंट सहित स्टील, चीनी मिल, पेपर के उद्योग बंद हुए हैं। इकाइयों के संचालन से सीमा पर काम बढ़ जाएगा। भारत से नेपाल जानी वाली गड़िया कम हो गई है।
कृष्ण प्रसाद धिमीरे, अध्यक्ष, कस्टम एजेंट एसोसिएशन
पिछले पांच महीनों में कई स्टोर खाली हो गए हैं
बुटवल इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिप्रसाद आर्यल के कहा कि बुटवल के मुख्य वाणिज्यिक और आंतरिक क्षेत्रों में पिछले पांच महीनों में कई स्टोर खाली हो गए हैं। उन्होंने कहा, जब कोई बिक्री नहीं होती और निवेश पर कोई रिटर्न नहीं होता तो व्यापार कौन करता है। भैरहवा का भी यही हाल है। बुद्धाचौक, देवकोटाचौक, बैंकरोड, नारायणस्थान समेत अन्य जगहों पर व्यवसाय करने वाले लोग छोड़कर विदेश चले गए है।
नेपाल उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ लुंबिनी प्रांत के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद शर्मा ने कहा कि निजी क्षेत्र पतन की स्थिति में है, जहां वह आगे नहीं बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी शिकायतें कोई नहीं सुनता, समस्या वहीं हैं जहां पहले थीं। बैंकों का पैसा ख़त्म हो रहा है, सरकार रियायतें नहीं दे रही है। निर्माण कार्य ठप है, ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया गया है।