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Maharajganj News: सावधान ! व्रत के सामान में भी मिलावट...संभलकर करें खरीदारी

Sun, 30 Mar 2025 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। नवरात्र में व्रत रहने वाले श्रद्धालु फलाहार में कुट्टू और सिंघाड़े का आटा इस्तेमाल करते हैं, जो काफी महंगा है। इससे कुछ दुकानदार मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट कर रहे हैं, तो कुछ कारोबारी पिछले सीजन के खराब हो चुके आटे को खपाने की कोशिश में लगे हैं।
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इतना ही नहीं बाजार में देसी घी और चंदन भी मिलावटी होने की आशंका है। करीब एक करोड़ का मिलावटी सामान धंधेबाज खपाने की तैयारी कर लिए हैं। शनिवार को बाजार में जाकर जानकारों से कमियाें पर चर्चा की गई तो चौंका देने वाले तथ्य सामने आए।
एक दुकान पर देसी घी के पैक पर खाने योग्य नहीं लिखा मिला, जिसे लोग जानकारी के अभाव में सस्ता होने के चलते खरीद रहे हैं। यही हाल हवन सामग्री, चंदन, धूप और पूजन के अन्य सामान का है। फलों का जिक्र करना भी जरूरी है, क्योंकि नवरात्रि में पूजा से लेकर फलाहार में इनकी उपयोगिता है।
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सूत्रों की माने तो केले को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि सामान में भी घालमेल है। सबसे ज्यादा लोगों की सेहत के लिए खतरा कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से है, क्योंकि खराब आटे के सेवन से व्रत तो टूटेगा ही, साथ ही फूड प्वाइजनिंग हो सकती है, जिससे आप अस्पताल तक पहुंच जाएंगे।
आटा खरीदने से पहले आम लोगों के पास गुणवत्ता की पहचान करने का कोई तरीका नहीं है इसलिए जानकारों की सलाह है कि विश्वसनीय दुकान से ही कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की खरीदारी करें। ज्यादातर कारोबारी गोरखपुर मंडी से थोक सामान मंगा रहे हैं। सबसे अधिक मांग, तिल के तेल, मुंगफली, कुट्टू का आटा, मखाना, लावा, घी की है। कारोबारी नरेंद्र जायसवाल बताते हैं कि बाजार में सस्ते के चक्कर में कोई खराब गुणवत्ता वाली सामाग्री मिल जाएगी। कुट्ट का आटा 65 से लेकर 70 तक अगर मिले तो मान लिजिए मिलावटी है। वहीं बाजार में सांवा का चावल 60 रुपये किलो मिलावट वाला ही मिलेगा। बाजार में सिर्फ कुछ लोग ही अच्छे कारोबारियों का नाम खराब करने में लगे रहे हैं। किराना कारोबारी वीरेंद्र कहते हैं कि लोगों को सस्ते के चक्कर में नहीं अच्छी गुणवत्ता वाली सामाग्री की खरीदारी करनी चाहिए।
रेट सस्ता कर खपा देते हैं मिलावटी सामाग्री : दीप जलाने के लिए तिल का तेल या देसी घी हो सबकी क्वालिटी घटिया है। हवन सामग्री, रोली, कुमकुम, पूजा की हल्दी आदि की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। कारोबारी ज्ञानप्रकाश ने बताया कि बाजार में शुद्ध तिल 145 से 150 रुपये लीटर है। मिलावट वाले तील का तेल 100 रुपये प्रति लीटर मिल जाएगा। मिलावट वाला सभी कारोबारी नहीं रखते हैं। यह सिर्फ कुछ के पास मिल सकता है। कारोबारियों के मुताबिक नकली कलावा सिंथेटिक धागे का होता है। असली कलावा आसानी से टूट जाता है। नकली कलावा तोड़ने में बहुत जोर लगाना पड़ता है। असली कपूर की खूशबू काफी तेज होती है।
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