महराजगंज। धंधेबाजों ने अपना कारनामा छिपाने के लिए नियम कानून का सहारा लेना शुरू कर दिया है। क्षेत्र में जितना मक्के का उत्पादन होता है, उससे ज्यादा का गेट पास बनवाकर दो नंबर के मक्के को एक नंबर आसानी से बना दिया जा रहा है। बकायदा प्रपत्र होने की वजह से इस पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती है। वहीं दूसरी ओर गेट पास जारी होने को लेकर संबंधित लाइसेंसी से पूछताछ भी नहीं होती है। हालांकि इसमें सब कारोबारी नहीं शामिल हैं। कुछ लोग अपने लाभ के चक्कर में ऐसा करते हैं।
सूत्र बताते हैं कि मक्का बरामदगी में खेल होता है। सीमावर्ती क्षेत्र में बरामद हुए मक्के को कस्टम में शुल्क जमा करने के बाद इसे एक नंबर बना दिया जाता है। नियम की आड़ में इसे मंडी से गेट पास भी जारी कर आगे भेज दिया है। इससे बाहर भेजने पर समस्या नहीं होती है। अगर कहीं जांच होती है तो पास दिखाकर काम चला दिया जाता है। सीमावर्ती क्षेत्र में मक्के के उत्पादन की बात करें तो इन क्षेत्र में कुछ खास उत्पादन नहीं होता है। लेकिन गेट पास जारी हो जाता है।
हैरानी की बात है कि उत्पादन से अधिक का पास बनाकर धंधेबाज अपना काम आसानी से कर रहे हैं। इस पर किसी की नजर भी नहीं पड़ रही है। क्योंकि सब कुछ कायदे कानून के अनुसार होता है।
31 दिसंबर की बात करें तो सशस्त्र सीमा बल 66 वीं वाहिनी के बीओपी सुंडी के जवानों ने गश्त के दौरान भारत नेपाल सीमा के पिलर संख्या 526/18 के पास पिकअप पर लदा 49 बोरी मक्का बरामद किया था जिसमें आरोपी फरार हो गया था। इसी तरह से सीमावर्ती क्षेत्रों में मक्के की बरामदगी होती रहती है।
उधर नवीन मंडी निचलौल में करीब 200 लाइसेंस धारक व्यापारी हैं। इनमें से लगभग 30 से 35 व्यापारी काफी सक्रिय हैं। इन्हीं में से एक दो व्यापारी ऐसे हैं जो मंडी के पोर्टल से मक्का के लिए ऑनलाइन मंडी गेट पास काट लिए हैं। जिन्हें चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसी तरह से नौतनवा मंडी में भी इसी तरह से खेल कर धंधेबाज अपना का काम कर रहे हैं।