-ए-निगेटिव ब्लड के लिए मरीजों को हो रही परेशानी
-900 यूनिट ब्लड सेंटर में मात्र 29 यूनिट ब्लड की उपलब्धता
- बी निगेटिव और और ओ निगेटिव ग्रुप की मात्र एक-एक यूनिट ही ब्लड सेंटर में उपलब्ध
महराजगंज। जिला अस्पताल के ब्लड सेंटर में इन दिनों निगेटिव ब्लड ग्रुप की कमी देखने को मिल रही है। अस्पताल में स्थापित ब्लड सेंटर की क्षमता 900 यूनिट ब्लड सुरक्षित रखने की है लेकिन वर्तमान स्टॉक बेहद कम है। सेंटर में महज 29 यूनिट ब्लड है।
जानकारी के अनुसार, यहां केवल बी पॉजिटिव 8 यूनिट, एबी पॉजिटिव 8 यूनिट, ए पॉजिटिव 5 यूनिट, ओ-पॉजिटिव 5 यूनिट, ए-निगेटिव 1 यूनिट, बी निगेटिव 1 यूनिट और ओ निगेटिव मात्र 1 यूनिट ही बचा है। जिला अस्पताल के ब्लड सेंटर में सबसे अधिक मांग बी पॉजिटिव और ओ पॉजिटिव ब्लड की रहती है, क्योंकि ये ग्रुप यूनिवर्सल डोनर और रिसीवर के रूप में महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, निगेटिव ब्लड ग्रुप विशेषकर ए-, बी-, ओ- और एबी की कमी बड़ी समस्या बनी हुई है।
डॉक्टरों के अनुसार, निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले लोग आबादी में कम होते हैं, जिस कारण उनका डोनेशन भी कम मिलता है। इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को ब्लड उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है। ब्लड सेंटर में डॉक्टर उमेश मौर्य, देवेश पांडेय, बलवंत चौधरी, विनीत राय और मुकेश श्रीवास्तव जैसे कर्मी तैनात हैं, जो ब्लड ट्रांसफ्यूजन और संबंधित सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा कैंसर, थैलीसीमिया और गर्भवती महिलाओं को भर्ती होने पर फ्री में ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। इसी तरह, कैदियों, एचआईवी प्रभावित मरीजों और लावारिस मरीजों को भी मुफ्त ब्लड दिया जाता है।
फरवरी महीने में अस्पताल ने 5 यूनिट ब्लड कैंसर पीड़ितों को और 11 यूनिट थैलीसीमिया के मरीजों को निःशुल्क प्रदान किया। जनवरी में थैलीसीमिया के 12 यूनिट, कैंसर के 7 यूनिट और एचआईवी प्रभावित मरीजों के लिए 4 यूनिट ब्लड फ्री में दिया गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि अस्पताल गरीब और गंभीर रोगियों के लिए ब्लड सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है लेकिन निगेटिव ब्लड की कमी से कई मरीज प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे में ब्लड सेंटर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे स्वैच्छिक रक्तदान करें, खासकर निगेटिव ग्रुप वाले लोग आगे आएं। नियमित कैंप आयोजित कर ब्लड संग्रह बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्जन
समय-समय पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। एनजीओ और एसएसबी से सहयोग लिया जाता है। होली के बाद रक्तदान शिविर का आयोजन करते हुए ब्लड सेंटर में ब्लड की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी।
-सीएमएस डॉक्टर एके द्विवेदी