ट्रांसपोर्ट और बस से मंगाते हैं बड़े महानगरों से सामान, अधिक मंगाए जाते हैं नेपाल कस्टम ड्यूटी लगने वाले सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। 50 हजार रुपये तक का सामान मंगाने पर जीएसटी में पंजीकृत होना जरूरी नहीं है। इसका फायदा उठाकर देश के बड़े महानगरों से धंधेबाज ट्रांसपोर्ट और बस से कई चरण में सामान मंगाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। धंधेबाज सामान एकत्र कर कैरियरों के माध्यम से नेपाल पहुंचा देते हैं। जहां से सामान मंगाया जाता है, उस कारोबारी से निजी उपयोग की बात कह आधार देकर सामान मंगा लिया जाता है।
इस पूरे खेल को समझने के लिए सीमावर्ती इलाकों के ट्रांसपोर्ट पर जाना पड़ा। यहां 10 से लेकर 50 हजार मूल्य के सामान अधिक मात्रा में कई लोगों के नाम से मंगाए गए थे। इसे देखकर कोई समझ नहीं पाएगी की इसके पीछे का खेल क्या है? कई टूकड़ों में सामान मंगाया गया है। इसमें कपड़े, मोटर पार्ट्स, सैनिटरी का सामान अधिक मंगाया जाता है। इन सामानों पर नेपाल में कस्टम ड्यूटी अधिक लगती है। यही कारण है कि इन्हीं सामानों को अधिक मंगाया जाता है। खास बात यह है कि ये सामान पंजीकृत गोदाम में नहीं रखे जाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र में ऐसे गोदाम बने हैं, जहां इस तरह के सामान रखे जाते हैं। करोड़ों के सामान को अवैध गोदाम में रखा जाता है। इसका कोई लेखाजोखा नहीं रहता है। बीते माह पुलिस प्रशासन की टीम ने छापा डालकर लाखों का अवैध सामान बरामद किया था। इस गड़बड़झाले की पोल तभी खुली थी। इस प्रकरण में कार्रवाई भी हुई थी। सूत्र बताते हैं कि बार्डर एरिया में करीब 100 लोग ऐसे हैं, जिनका सामान देश के बड़े महानगरों से कम मूल्य का प्रत्येक दिन आता है। ये सामान ज्यादातर रोडवेज बस से आ जाते हैं। इसमें कोई खतरा भी नहीं रहता है। निजी उपयोग के लिए सामान मंगाने का दावा कर नेपाल भेजकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है। इस पूरे सिंडिकेट का संचालन नेेपाल में बैठे धंधेबाज करते हैं, उनका पूरा नेटवर्क भारतीय क्षेत्र में फैला हुआ है। सर्वाधिक कपड़े ही मंगाए जाते हैं। क्योंकि नेपाल में भारतीय कपड़ों की मांग अधिक है। हर माह करोड़ों का सामान सरहद पार हो रहा है।
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सामान मंगवाकर नेपाल की पार्टियों को भेजते हैं
सामान खरीदने के दौरान पैन, आधार कार्ड लेकर ट्रांसपोर्ट सोनौली तक लाते हैं, फिर उनसे कैरिंग चार्ज लेकर उनके घर नेपाल तक भेज देते हैं। सूत्रों की माने तो इस तरह का काम करने वाले सोनौली में करीब 50 से अधिक ऐसे ट्रांसपोर्टर हैं, जो दूसरे के आधार कार्ड पर सामान मंगवा कर नेपाल की पार्टियों को भेजते हैं।
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जीएसटी नंबर पर मंगाते हैं बाहर से सामान
सूत्र बता रहे हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र में जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराकर लगभग दर्जन भर लोग बाहर से सामान मंगाते हैं। फर्म का पूरा लेखा जोखा भी रखते हैं। खेल यह हो रहा है कि अपने जीएसटी नंबर पर सामान मंगाकर नेपाल कैरियरों के जरिए पहुंचा देते हैं। हकीकत में फर्म को खोजा जाय तो कहीं नहीं मिलेगा, न तो दुकान मिलेगी, न ही इनका कोई कार्यालय ही मिलेगा। जबकि काम आसानी से होता है।
जो व्यक्ति रजिस्ट्रेशन जीएसटी का लेकर काम करता है, उसका निर्धारित स्थान पर ऑफिस में होना चाहिए। अगर नहीं है तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन उनका निरस्त करने का प्रावधान है। दूसरी ओर टीम नौतनवा क्षेत्र के ट्रांसपोर्टर अथवा और रास्ते में जांच करती है, जैसे किसी का भी बिल नहीं है, या माल किसी दूसरे पत्ते पर है। बिल किसी दूसरे पते पर कटा हुआ है। ऐसी तमाम कमियों पर कार्रवाई की जाती है।
-रुद्रशंकर राय, असिस्टेंट कमिश्नर, जीएसटी प्रवर्तन