महराजगंज। जिले में शहर से लेकर गांव की गलियों में इन दिनों कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। इनका सबसे अधिक आतंक परसामलिक थाना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यहां पर खूंखार कुत्ते करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को काटकर घायल कर चुके हैं।
आलम यह है कि बच्चों व बुजुर्गों का राह चलना दूभर हो चुका है। क्योंकि, कुत्ते इन्हें आसानी से अपना शिकार बना ले रहे हैं। इस गंभीर समस्या के प्रति प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। इसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। हालांकि सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) उपलब्ध है।
जानकारी के मुताबिक, गर्मी बढ़ने से कुत्ते हिंसक हो रहे हैं और लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। आए-दिन इन खूंखार कुत्तों के हमलों में लोग घायल होकर उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। 14 मार्च को परसामलिक थाना क्षेत्र में खूंखार कुत्तों ने एक दर्जन से अधिक लोगों को शिकार बनाया था। फिलहाल इन सभी के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, लेकिन कुत्ते का डर अभी भी बना हुआ है।
लक्ष्मीनगर निवासी कमलेश सिंह, परसासुमाली निवासी रामचंद्र, आर्यन सहानी, दीपक यादव आदि ने बताया कि इन दिनों शहर से लेकर देहात के गलियों में खूंखार कुत्ते घूम फिर रहे हैं। इन कुत्तों के डर से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। खूंखार कुत्ते राह चलते लोगों पर हमलाकर दे रहे हैं। वहीं रात के समय सड़कों पर खूंखार कुत्तों का पहरा रह रहा है।
यह कुत्ते सड़क से गुजरने वाले वाहनों के पीछे भी काफी दूर तक दौड़ लगाते हैं। ऐसे में पैदल चलने वाले लोगों को तो कुत्ते आसानी से अपना शिकार बना ले रहे हैं। लोगों ने कहा कि कुत्तों के हमले में घायल होकर लोग एआरवी लगवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर के साथ ही जिला अस्पताल पहुंच जा रहे हैं। इन दिनों अस्पताल के एआरवी कक्ष में एआरवी लगवाने वाले मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि तापमान बढ़ने के साथ ही कुत्तों के व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है। इससे कुत्ते हिंसक हो जाते हैं। हिंसक कुत्ते लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। अस्पताल में रोजाना लोग एआरवी लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। कुत्ते या बंदर के काटने पर एआरवी जरूर लगवाना चाहिए।
देसी दवाओं के चक्कर में नहीं पड़ना चहिए। इन्होंने आगे कहा कि कुत्ता काटने पर घाव को साबुन और पानी से साफ करें। घाव पर एंटीबायोटिक क्रीम लगा लें। देसी दवाओं व जड़ी बूटियों के चक्कर में न पड़ें। पीड़ित को तत्काल चिकित्सक के पास लेकर जाएं। एआरवी जरूर लगवाएं। लापरवाही न बरतें।
कुत्तों से इस तरह बरते सावधानी
पशु डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि लोगों को कुत्तों से सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। अगर कुत्ता कुछ खा पी रहा हो तो उसके पास न जाएं। कुत्ते आपस में लड़ रहे हों तो भी उनसे दूर रहें। सोते हुए कुत्ते को किसी भी हालत में न छेड़ें। कुत्तों के एकदम नजदीक से भागदौड़ न करें। बच्चों को भी बताएं, कुत्तों के कान और पूंछ आदि न खीचें। ऐसा करने पर कुत्ते अचानक हमलावर हो जाते हैं।
इन दिनों जिला मुख्यालय सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टोर में पर्याप्त एआरवी (वायल) उपलब्ध है। एक वायल में करीब नौ से 10 लोगों को इंजेक्शन लगाया जाता है। ज्यादातर लोग जिला अस्पताल में आकर एआरवी लगवाते हैं। अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है।
-डॉ. श्रीकांत शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी