महराजगंज। बकरीद सात जून को मनाई जाएगी। इसे लेकर मंडी में बकरों की खरीदारी की जा रही है। अधिक रकम पर बिकने वाले बकरों का नाम भी रखा गया है। शुक्रवार को सोनौली के इब्राहिम का सबसे महंगा बकरा (राजू) 1.97 लाख रुपये में बिका। सिद्धार्थनगर जनपद के उसका बाजार से आए इरफान ने इसे खरीदा। बकरा लंबी गर्दन व सफेद रंग के कारण आकर्षण का केंद्र रहा। इससे कम मूल्य में हमीदनगर के गुड्डू का बकरा (लालू) 1.57 लाख में बिका। इसे कोल्हुई के रहने वाले रफिक ने खरीदा।
इरफान ने बताया कि उनका परिवार मुंबई रहकर भंगार (कबाड़) खरीदने-बेचने का काम करता है। गांव उसका बाजार मेंहदिया में है। त्योहार में आए हैं तो कुर्बानी का बकरा यहां खरीदने आए हैं। बाजार में 55 की संख्या में भेंड़ा बिके, जिसकी खरीद नेपाल से आए नागरिकों ने की। कोल्हुई मंडी में 37 की संख्या में बकरों की कुल बिक्री 40,70,000 रुपये में हुई। एक बकरें की कीमत 40 हजार से एक लाख दस हजार रुपये के बीच रही।
गोबरहवा मंडी नफीस 63 बकरों को लेकर मंडी में आए थे। उन्होंने औसतन एक बकरे को 40 से 50 हजार के रेंज में बिक्री की। महराजगंज जिला मुख्यालय के हमीद नगर निवासी व्यापारी गुड्डू कुरैशी तीन पिकअप में बकरों को लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि सभी बकरे जनपद के ही ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदा गए थे। सभी खर्च निकालने के बाद 15 हजार से अधिक का मुनाफा हुआ। हमीद नगर के ही व्यापारी कमरुद्दीन व शरीफुल कुरैशी ने बताया कि 70 लाख से अधिक का कारोबार कोल्हुई मंडी का रहा। 55 की संख्या में भेड़ा भी बिका जिसे नेपाली नागरिकों ने 35 से 40 हजार रुपये प्रति भेड़ा के हिसाब से खरीदा। मंडी में मेंहदावल, लोटन, उसका, मोहाना से खरीदार पहुंचे थे। कुल 160 से अधिक बकरे बिके।
अल्लाह के प्रति समर्पण का प्रतीक ईद- उल- अजहा
मुख्यालय के नूरी जामा मस्जिद के सदर शमशुल हुदा खान ने कहा कि ईद-उल- अजहा खुदा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। त्योहार हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल की ऐतिहासिकता का प्रतीक है जो संदेश देता है कि अल्लाह पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।