फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: पॉक्सो एक्ट में आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

Sat, 07 Jun 2025 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
विज्ञापन
विज्ञापन
महराजगंज। विशेष न्यायाधीश, पोक्सो अधिनियम, महराजगंज पीसी कुशवाहा की अदालत ने दुष्कर्म व अपहरण के मामले में नामजद दो अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह आदेश अभियुक्त अभिषेक व अमित की ओर से दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के उपरांत पारित हुआ। पत्रावली के अनुसार, प्रकरण थाना घुघली क्षेत्र के एक गांव का मामला है। अभियुक्तगण अभिषेक (38) व अमित (34) पर किशोरी से अपहरण कर दुष्कर्म करने और बाद में उसे बिहार में अज्ञात स्थान पर छोड़ने का आरोप है। इस मामले में केस दर्ज है। अभियुक्तों के अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि अभियुक्तों को झूठे आरोप में फंसाया गया है। प्रारंभ में केवल लड़की के लापता होने की सूचना थी। 21 जून 2023 को हुई घटना की प्राथमिकी कई दिन बाद दो जुलाई को दर्ज की गई। वादी ने पहले कई दिन तक कोई लिखित शिकायत नहीं दी और बाद में राजनीतिक दबाव में झूठा केस दर्ज कराया गया। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अभियुक्तों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वे समाज में प्रतिष्ठित हैं। विशेष लोक अभियोजक ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्तों पर गंभीर प्रकृति के अपराध का आरोप है। पीड़िता नाबालिग है और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ है, जो अग्रिम जमानत देने योग्य अपराध नहीं है। अदालत ने पत्रावली व साक्ष्यों के अवलोकन के आधार पर पाया कि 13 वर्षीय पीड़िता को अभियुक्तों ने 21 जून की रात हरेंद्र मिश्र के घर बुलाया और चोरी के झूठे आरोप में उसे पीटा। बाद में अभियुक्तगण उसे चार पहिया वाहन से ले गए, आंखों पर पट्टी बांधकर बिहार में छोड़ दिया। पीड़िता ने एक अनजान महिला की मदद से विवाह कर लिया और डेढ़ वर्ष बाद वापस आई। उसके बयान में अभियुक्तों द्वारा बारी-बारी से दुष्कर्म किए जाने की बात भी सामने आई। चिकित्सा परीक्षण व आयु प्रमाण पत्र से पुष्टि हुई कि पीड़िता बालिग नहीं थी।न्यायालय ने माना कि अभियुक्तगण के विरुद्ध प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप हैं। पीड़िता के सुसंगत और विस्तारपूर्ण बयानों से स्पष्ट होता है कि अपराध पूर्व नियोजित था। अत इस परिस्थिति में अभियुक्तों को अग्रिम जमानत दिया जाना न्यायहित में नहीं है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें