- नेपाल के तरकुलवा के पास महाव का तटबंध भी टूट गया था, खेत में जलभराव
नौतनवा। नेपाल हो रही बारिश का असर भारतीय क्षेत्र में दिख रहा है। यहां की नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। इससे नदियों के किनारे बसे गांव के किसानों को चिंता सताने लगती है। दो दिनों में हुई बारिश से मंगलवार को रोहिन नदी और महाव नाला का जलस्तर बढ़ा था। नेपाल के तरकुलवा के पास महाव का तटबंध भी टूट गया था, लेकिन बुधवार को जलस्तर कम हो गया। जबकि, बघेला नाला बुधवार को भी उफान पर था।
नेपाल की पहाड़ियों से निकल कर नौतनवा तहसील क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली रोहिन नदी, बघेला और महाव नाला बरसात आते ही हर साल तबाही मचाती है। उफान होने पर बाढ़ का पानी खेतों में फैलता है, जिससे धान की नर्सरी और रोपाई बर्बाद हो जाते हैं। बघेला नाला नेपाल के पहाड़ी से निकल कर नौतनवा तहसील क्षेत्र के रेहरा गांव के पास भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। 22 किलोमीटर की दूरी में प्रवाहित होते हुए चकदह गांव से पास जंगल में दोमुहान घाट पर प्यास नदी में मिल जाती है। नाले की सफाई न होने से बरसात के समय बाढ़ का पानी उफनाकर सिवान में फैल जाता है, जिससे फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है। दो दिनों में हुई बरसात से बघेला नाला का जलस्तर बढ़ा है।
बुधवार को बघेला उफान पर थी और खेतों में पानी फैल रहा था। ग्रामीण अनिल कुमार, महबूब अली, जय किशुन यादव, राम बचन यादव, शिवपूजन, चंद्रिका, राम मिलन, राम बेलास यादव, विनोद, बच्चू सिंह, रामजी यादव, कपिल आदि किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन बघेला की सफाई और चौड़ीकरण करा दे तो फसलें बर्बाद नहीं होतीं। प्रशासन की ओर से हर साल पोकलेन मशीन से महाव की तबाही रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन समस्या का अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। इस वर्ष अभी भारतीय क्षेत्र में महाव तटबंध नहीं टूटा है। महाव का जलस्तर बढ़ने से नेपाल के तरकुलहा में पश्चिमी तटबंध टूटा था, जिससे झींगटी और मर्यादपुर गांव के सिवान में और नो मेंस लैंड में पानी फैला था।
तटबंधों पर पड़ता है दबाव
नेपाल के पहाड़ियों से निकलकर महाव नाला कनरी चकरार गांव के पास भारतीय सीमा में प्रवेश करती है। यहां से तहसील क्षेत्र के बरगदवा और परसा मलिक थाना क्षेत्र में प्रवाहित होती हुई सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के जंगल में बहने वाली प्यास नदी में मिल जाती है। जंगल में महाव नाला का तल संकरा व बहाव टेढ़ा-मेढ़ा होने से पानी का दबाव तटबंधों पर पड़ता है। इससे कमजोर तटबंध टूट जाता है। नेपाल के पहाड़ियों से निकलने के बाद भारतीय क्षेत्र में महाव नाला कुल 23 किमी लंबाई में प्रवाहित होती है। इसमें 15 किमी बाहर और आठ किमी हिस्सा जंगल से होकर गुजरता है। महाव में 65 से अधिक खतरनाक मोड़ हैं।
महाव नाला से इन गांवों में होती है तबाही
महाव का पूर्वी बांध टूटने से बरगदवा क्षेत्र के बरगदवा, देवघट्टी, हरखपुरा, शिकारगढ़, नरायनपुर, हरपुर, अमहवा, बेलहिया, खजहिया, गनेशपुर आदि गांव प्रभावित होते हैं। जबकि पश्चिमी तटबंध टूटने से खैरहवा दूबे, कोहरगड्डी, असुरैना, दोगहरा, विशुनपुरा, जहरी, सागरहवा, महरी घोड़हवा, लुठहवा, गंगवालिया आदि गांवों में तबाही मचाती है ।
जर्दी-डोमरा बांध मरम्मत के नाम पर नहीं पड़ी मिट्टी
बंधे के रेन कट देख सहमे है अनंतपुर वासी
संवाद न्यूज एजेंसी
पनियरा। विकास खंड पनियरा क्षेत्र में बहने वाली रोहिन नदी के तट पर बने 28.850 किलोमीटर लंबे अनंतपुर-लालाबडहरा व जर्दी-डोमरा बांध के किनारे बसे ग्रामीण पहले ही बरसात में बंधे में हो रही जबरदस्त रेन कट देख सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 20 जून तक बंधे पर मरम्मत के नाम पर मिट्टी नहीं पड़ी। जगह-जगह मिट्टी का ढेर रखा गया है, जिसे बरसात में रेन कट होने पर भरा जाएगा। किलोमीटर 0.450 पर अनंतपुर के पास रेन कट है। वहीं आगे बढ़ने पर अनंतपुर-बघौना के बीच रेन कट दिखाई दे रहा है। किलोमीटर शून्य से लाला बड़हरा तक बीच में कहीं मिट्टी नहीं पड़ी है। केवल जगह-जगह मिट्टी का स्टाॅक देखने को मिल रहा है। ग्राम पंचायत अनंतपुर मोथहीं टोला टेंगरहना निवासी दुर्गावती ने बताया कि बाबू बरसात शुरू हो गईल, लेकिन मिट्टी नहीं पड़लबा बाढ़ आई तो बंधा नहीं रोक पाई। सुचितपुर बघौना निवासी अदालत ने बताया कि बंधे पर बसे लोग अपने अपने घर के सामने खुद मिट्टी गिरवाकर अपनी हिफाजत कर रहे हैं। ग्राम पंचायत तेंदुअहिया निवासी रामनिवास ने बताया कि बंधे पर खड़ंजा लागाया जा रहा है, लेकिन जीरो बंधा पर कुछ नहीं हो रहा है, जहां बरसात में चलना दुश्वार हो जाता है। वहीं, ग्राम पंचायत जर्दी के रामेश्वर ने बताया बंधे पर खड़ंजा लगाया जा रहा है।
सिंचाई खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता राजीव कपिल ने बताया कि कि बरसात में रेनकोट होना स्वाभाविक है। जो हैं वह भरे जा रहे हैं। बंधे पर भी मिट्टी डाली जा रही है।