महराजगंज। सड़क के किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थ यानी स्ट्रीट फूड्स अधिकांश लोग बड़े चाव के साथ खाते हैं, लेकिन इनके सेवन से अपच, पेट में गैस बनने या अन्य बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। बगल में खुले नालों पर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। ऐसे में आप बीमार हो सकते हैं।
शनिवार को दोपहर 12 बजे रैन बसेरा के पास नाली पर ठेले लगे थे। बिरयानी तैयार हो गया था। वहीं किनारे एक युवक बिरयानी खा रहा था। दूसरा युवक भी बहुत चाव से खा रहा था। देखकर लगा की स्वाद काफी अच्छा होगा। नाली से बदबू आ रही थी, नाली में कूड़े कचरे भरे थे। तेज हवा के कारण धूल भी उड़कर भगौने में जा रही थी। उस पर लगाया गया कपड़ा भी धूल से पटा था। मक्खियां भिनभिना रही थीं। वहीं खाने वालों को इसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
आगे बढ़ने पर बस स्टेशन के बगल के नाली के ऊपर टिकिया फुल्की का ठेला लगा था। कचरा फेंकते फेंकते नाली भर गईं थी। कड़ाही में तेल खुले में रखा था। ग्राहक के आते ही उस प्लेट में परोस दिया जा रहा था, लेकिन खाने वाले को इससे कोई फर्क नहीं था कि यह उनके स्वास्थ्य को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। चौक रोड पर तो नाली के उस पर दुकान सजाकर बर्गर बनाया जा रहा था।
फरेंदा रोड पर सर्विस लेन पर फूड वैन दिखा। यहां चाइनीज डिस बनाया जा रहा था। निचलौल से आए दिनेश कुमार दुकान पर पहुंचे और उन्होंने मंचूरियन का ऑर्डर दिया। वहीं पास में कूड़ेदान के किनारे खड़े होकर इंतजार करने लगे। करीब पांच मिनट में उन्हें प्लेट में मचूरियन मिला, वह खाना शुरू किए। कूड़े से बदबू आ रही थी। किसी तरह से वह खाकर आगे बढ़ गए। थोड़ी देर में एक गाड़ी धुआं उगलते हुए आगे बढ़ी।
बार-बार एक ही तेल के प्रयोग से बनने वाले फास्ट फूड से बिगड़ रहा पाचन तंत्र
महराजगंज। गांधी नगर के 16 वर्षीय किशोर पेट में समस्या हो गई। वह बार बार बीमार हो जाते हैं। इस वजह से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो गई। घर वालों से एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने जांच किया जो पता चला की आंत में सूजन है। यह बीमारी बार-बार एक ही तेल के प्रयोग से बनने वाले फास्ट फूड के चलते ही रही है। इससे पाचन मंत्र बिगड़ रहा है। धीरे-धीरे इसका कुप्रभाव शरीर की अन्य क्रियाओं पर भी होता है। बच्चों में मोटापा बढ़ता है जो बाद में तनाव, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी अन्य बीमारियों को बढ़ाता है।
फिजिशियन डॉ. एएम भाष्कर बताते हैं कि पेट की समस्या वाले मरीज ओपीडी में अधिक आ रहे हैं। हर दिन 12 साल के बच्चों और 15-17 साल के किशोरों की संख्या बढ़ रही है। सब पेट में दर्द नित्य क्रिया में परेशानी, भूख नहीं लगने आदि की शिकायत लेकर आते हैं। जब उनसे पिछले कुछ महीने के खाने के बारे में पूछताछ की जाती है, तब पता लगता है कि बच्चा स्कूल से लौटते वक्त दोपहर में कभी बर्गर-चाउमीन खाकर आता है तो कभी आते ही पिज्जा का आर्डर करता है। नास्ते में हर दिन नूडल्स और पस्ता ही चाहता है। यह चटपटा खाना बच्चों की आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। इस प्रकार की खाद्य सामग्री का पेट में पूरी तरह से पाचन नहीं होता। आंतों में मैदा की लेयर जमने लगती है। कुछ दिन बाद आंत में फास्ट फूड में प्रयुक्त मैदा चिपक जाता है।