महराजगंज। बीते दिनों आग लगने की घटनाएं खूब हुईं। शहर के आसपास खेतों में गेहूं के डंठल जले। अब इससे नई समस्या खड़ी हो गई है। एक तरफ एक्यूआई 160 हो गया। वहीं राख लोगों के छतों व घरों में आ रही है। आंखों में जलन की समस्या भी बढ़ गई है। चश्मा लगाने के साथ मास्क लगाकर आने जाने का सुझाव डॉक्टर दे रहे हैं। बीते साल मई माह में एक्यूआई 161 पर रहा।
रविवार को सुबह शहर के वातावरण में धुंध की चादर छाई रही। पारा 41 डिग्री पहुंचने से गर्मी बढ़ने के साथ तेज हवा चलने से धूल उड़ रही है। वहीं, पराली जलाने के कारण वायुमंडल में प्रदूषण बढ़ा है। इसके चलते आंख के अलावा लोगों को एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की दिक्कतें बढ़ रही हैं, जबकि दो दिन बाद मौसम में बदलाव होगा और तीन दिन तक बारिश के आसार बन रहे हैं। साथ ही हवा का रुख बदलेगा और पुरवा हवा चलेगी।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु पर असर पड़ रहा है। तापमान भी बढ़ रहा है। इधर, पांच दिन में पारा 40 से 43 डिग्री तक पहुंच जा रहा है। वहीं, पराली व कूड़ा जलाने, धूप व तेज पछुआ हवा के चलते धूल और जगह-जगह निर्माण कार्य के लिए रखे बालू उड़ रहे हैं। गर्म हवा के साथ धूल के कण ऊपर उठ रहे हैं और वायुमंडल में एक लेयर बन गई है। इसके कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। रविवार को शहर व आसपास के क्षेत्रों में धुंध छाई रही। सुबह घर से मार्निंग वॉक पर निकले लोगों को दिक्कत हुई। आंख में जलन महसूस हुई और खुजली के साथ पानी आने की शिकायत करते दिखे।
रविवार को विस्मिन नगर मोहल्ले में दिनेश के बरामदे में राख दिखी। दिनेश ने बताया कि प्रत्येक दिन की यही समस्या है। इसी तरह से चिऊरहा मोहल्ले में सर्वेश के छत पर राख दिखी। उन्होंने बताया कि खेत में गेहूं का डंठल जले हैं, वही राख उड़कर घर में आ रही है। आंखों में जलन भी हो रही है। सब्जी मंडी के आसपास बने घरों के लोग भी परेशान हैं। मंडी के पास रहने वाले राहुल कहते हैं कि बारिश हो जाती तो समस्या नहीं होती, लेकिन क्या किया जाय। हर साल ऐसे ही दुश्वारियां होती हैं।
पछुआ हवा धीरे-धीरे उत्तर दिशा में लद्दाख की ओर बढ़ रही है। इससे दो से तीन दिन में बारिश की संभावना बन रही है। बंगाल की खाड़ी में उच्च वायु दाब के कारण प्री मानसून की स्थिति बन रही है। बंगाल में इसे काल बैसाखी कहा जाता है। उसमें आंधी तूफान के साथ गरज चमक के साथ बारिश की संभावना रहती है। पुरवा और पछुआ हवा का संक्रमण हो रहा है। इसमें बंगाल की खाड़ी से हवा आ रही है, जो पछुआ हवा के साथ संक्रमण कर रही है।
-दिवाकर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर भूगोल विभाग, जवाहर लाल नेहरू पीजी काॅलेज
धूप में निकलने पर बचाव के लिए चश्मा जरूर लगाएं। जलन होने पर तत्काल ताजा और ठंडे पानी से आंख को धोना चाहिए। इसके बाद नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और उनकी सलाह पर ड्रॉप डालें व दवा लें। अपने मन से ड्रॉप लेकर नहीं डालना चाहिए। वातावरण में प्रदूषण बढ़ने से धुंध हो जाती है। इसकी वजह से लोगों को आंख में दिक्कत हो सकती है। धूप और प्रदूषण के कारण जलन होती है। मसलने से आंख में चुभन और लाली भी हो जाती है।
-डॉ. बीएन, नेत्र रोग विशेषज्ञ
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प्रदूषित हवा के कारण सांस की दिक्कत होती है। ऐसे में धूल, धुआं से दूर रहें, मास्क पहनें, धूप में कम निकलें, तला, भुना बाहर खुले में बिकने वाले सामान, खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रदूषण की धुंध होने के कारण लोगों की सेहत पर असर पड़ता है और दिक्कत बढ़ जाती है। एलर्जी के लक्षण वालों को इसकी वजह से आंख से पानी, जलन, सांस फूलने की परेशानी बढ़ जाती है। अस्थमा और सीओपीजी के मरीज में इससे दिक्कत की आशंका होती है।
-डॉ. एएम भाष्कर, चेस्ट रोग विशेषज्ञ
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सुबह टहलने के दौरान आंखों में जलन हो रही है। इधर एक सप्ताह से यह समस्या बढ़ी है। सुबह के अलावा दिन में भी बाइक चलाने पर समस्या हो रही है। तेज हवा चलने पर कभी कभी सांस फूलने जैसे समस्या होने लगती है। बीते दिनों जिला अस्पताल जाकर नेत्र चिकित्सक से परामर्श लिया। ड्राप लिया हूं, उसे सुबह शाम आंख में डालने से राहत मिल रही है।
-अतुल कुमार गुप्ता, वीरबहादुर नगर