महराजगंज। स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए एक आशा कार्यकर्ता को प्रतिदिन 15 आभा आईडी (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) बनाने का लक्ष्य दिया गया है। आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर यह पता लगाना होगा कि परिवार के कितने सदस्यों का ‘आभा आईडी’ बन चुका है। जिनका आभा आईडी नहीं बना है, उनका डेटा एकत्र कर मोबाइल एप के माध्यम से तुरंत पंजीकरण किया जाएगा।कार्यकर्ता अपनी रोजाना रिपोर्ट तैयार कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से सीएमओ कार्यालय को भेजेंगी।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान में जिले में 2,599 आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। , जो गांव-गांव जाकर यह काम करेंगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिले में 19,80,925 लोगों का आभा आईडी कार्ड बन चुका है। विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या से जोड़ा जाए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना देशभर में स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल रूप देने की दिशा में बड़ा कदम है।
आभा आईडी के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति का अलग स्वास्थ्य खाता तैयार किया जाएगा। जिसमें उसके इलाज, दवा, जांच रिपोर्ट, टीकाकरण और अन्य जानकारी रहेगी। भविष्य में इस आभा आईडी को देश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों से जोड़ा जाएगा। इससे मरीजों को किसी भी अस्पताल में उपचार के दौरान अपनी पूरी स्वास्थ्य जानकारी साझा करने में सुविधा होगी। डॉक्टर भी मरीज की हिस्ट्री देखकर बेहतर इलाज कर सकेंगे।
इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और नागरिकों को एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली का लाभ मिलेगा। इस प्रकार, आभा आईडी अभियान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक अहम कदम है बल्कि यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करेगा।
-डॉ. श्रीकांत शुक्ला, सीएमओ