निचलौल। भारत-नेपाल के कनमिसवा बाॅर्डर बीते दिनों तस्करी को लेकर काफी सुर्खियों में रहा। इतना ही नहीं यहां पर रात में तस्करों ने सुरक्षा टीम पर हमला कर गश्ती वाहन को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही एक जवान को जख्मी कर दिया था। इसके बाद से सुरक्षा टीम ने सतर्कता बरतते हुए सख्ती बढ़ा दी। सख्ती बढ़ने से तस्कर कनमिसवा बाॅर्डर से किनारा कस लिए हैं। हालत यह है कि अब तस्कर साइकिल की मदद से दूसरी पगडंडियों से अवैध सामान की खेप सरहद पार कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल की सीमा से सटे गांवों के लोगों को तस्करों ने अपने नेटवर्क में शामिल कर रखा है। ये लोग अवैध सामानों की खेप को बोरे में भरकर बड़े आराम से साइकिल की मदद से दोनों तरफ पहुंचा देते हैं। कैरियर इस कार्य में इतने एक्सपर्ट होते हैं कि सुरक्षा टीम के पलक झपकते ही सैकड़ों बोरी इधर से उधर कर देते हैं।
तस्कर अवैध सामानों की तस्करी के लिए निचलौल में खास सेंटर बनाया है। तस्कर निचलौल के घोड़हवा चौराहा, बरगदवा वार्ड, टिकुलिया, चिऊटहा रोड स्थित गोदामों तक अवैध सामानों को पहुंचाकर अपने को सुरक्षित महसूस करते हैं। सूत्रों की माने तो भारत-नेपाल के कनमिसवा बाॅर्डर पर 18 जुलाई को गश्त के दौरान चाइनीज नाशपाती लदा दो पिकअप को रोकने से आक्रोशित तस्करों ने सुरक्षा टीम पर जानलेवा हमलाकर एक जवान को जख्मी कर दिया था।
घटना के बाद से बाॅर्डर पर पूरे दिन हड़कंप मचा रहा। वहीं इस मामले में पुलिस ने जख्मी जवान की तहरीर पर 40 आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने के बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दी। घटना के बाद से पुलिस और सुरक्षा टीम ने कनमिसवा बाॅर्डर पर सख्ती बढ़ा दी है। ऐसे में तस्करों ने बाॅर्डर के छोटे पगडंडियों के रास्ते तस्करी शुरू कर दी है। इन रास्तों से अवैध सामानों की तस्करी करने के बाद तस्कर सीधे निचलौल पहुंच जाते हैं।
बाॅर्डर पर तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा टीम के साथ पुलिस भी लगी है। कनमिसवा बाॅर्डर पर सुरक्षा टीम पर हमला करने वाले आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर अन्य की गिरफ्तारी के लिए सरहद पर सख्ती बढ़ा दी गई है। जल्द ही अन्य फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
-अनुज कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी, निचलौल
तस्कर दोनों देशों के बाजारों पर रखते हैं नजर
भारत नेपाल बाॅर्डर पर सशस्त्र सीमा बल के जवानों का कैंप, कस्टम, यूपी पुलिस का थाना व चौकियां सुरक्षा व्यवस्था और बाॅर्डर से आयात निर्यात पर नजर रखती हैं। फिर भी अधिकांश बार तस्कर अपने मकसद में सफल रहते हैं। ये दावा किया जाता है कि खुली सीमा होने के कारण यहां तस्करी आम बात है। तस्कर दोनों देशों के बाजार पर नजर बनाए रखते हैं और जिस भी समान की कीमतों में दोनों देशों के बीच अंतर होता है उसकी तस्करी शुरू कर देते हैं। सीमा से सटे गांवों में रहने वाले व्यापारी, बेरोजगार और ग्रामीण आम तौर पर इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं।