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Maharajganj News: कागजों पर व्यवस्था, हकीकत में हवा-हवाई

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सदर सीएचसी पर नही बना है कोविड हेल्प डेस्क।संवाद - फोटो : MAHARAJGANJ
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कागजों पर व्यवस्था, हकीकत में हवा-हवाई
न कोविड हेल्प डेस्क का इंतजाम, न रख रहे सामाजिक दूरी का ख्याल
जिला अस्पताल, आंबेडकर पार्क, बस स्टेशन, बैंक परिसर में दिखी लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कोरोना से बचाव के लिए हर स्तर पर तैयारी की बात की जा रही हैं, लेकिन सरकारी विभागों में गंभीरता नहीं दिख रही। कोरोना काल में बनी हेल्प डेस्क सार्वजनिक स्थलों पर नहीं दिख रही है। जिला अस्पताल में भी कोविड हेल्प डेस्क सक्रिय नहीं है। मास्क और सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं हो रहा है। बचाव की पूरी तैयारी बस फाइलों में दिख रही है।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल परिसर में कुछ खास भीड़ नहीं थी। गेट के अंदर कोविड हेल्प डेस्क नहीं की व्यवस्था भी नहीं दिखी। एक कर्मचारी ने बताया कि कोरोना काल में हेल्प डेस्क बनी थी। एक कर्मी को हेल्प डेस्क पर तैनात किया गया था, मास्क, सैनिटाइजर एवं तापमान मापने वाली मशीन रखी गई थी। इस बार अभी तक डेस्क की व्यवस्था नहीं हुई है।
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नगर में आंबेडकर पार्क में काफी लोग आते हैं, लेकिन यहां भी वहीं कोरोना से जंग की व्यवस्था अधूरी है। निर्माणाधीन बस स्टेशन पर भी कोरोना से जंग की तैयारी नहीं है। परिसर में बस का इंतजार कर रहे ठूठीबारी के राधेमोहन ने बताया कि कोरोना से बचाव की तैयारी नहीं दिख रही है। कोरोना काल में मास्क दिया जाता था। यह व्यवस्था फिर लागू होनी चाहिए। स्टेशन परिसर में कोविड हेल्प डेस्क होनी चाहिए, लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
सदर सीएचसी में भी गंभीरता नहीं दिख रही। सीएचसी अधीक्षक डॉ. केपी सिंह ने बताया कि कोविड हेल्प डेस्क जल्द ही सक्रिय कर दी जाएगी। अस्पताल आने वाले लोगों को कोरोना से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है। नगर में बैंकों में भी कोविड हेल्प डेस्क नहीं दिखी। यहां तो भीड़ में लोग बगैर मास्क के आते जाते दिखे।
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सभी प्रमुख स्थानों पर कोविड हेल्प डेस्क सक्रिय करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोरोना से बचाव के लिए जिला पूरी तरह तैयार है।
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- सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
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90 फीसदी गांवों में निगरानी समितियां निष्क्रिय
महराजगंज। कोरोना के संभावित खतरे से निपटने के लिए प्रशासनिक स्तर से तैयारियों को भले ही तेज कर दी गी हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीरता नहीं दिख रही है। जिले के 882 ग्राम पंचायतों में से 90 प्रतिशत से अधिक गांवों में निगरानी समितियां सक्रिय नहीं हैं। गांवों में पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर तक का पता नहीं चल रहा है। कोरोना काल में जिले के सभी गांवों निगरानी समिति बनी थी। समिति के संचालन के लिए प्रधान को नोडल तथा आशा कार्यकर्ता को सचिव बनाया गया था। वे बाहर से आने वाले लोगों का न सिर्फ पूरा विवरण रखते थे। समिति के पास मौजूद पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर से लोगों की जांच होती थी। कोविड काल समाप्त होते ही सारी व्यवस्था ठप हो गई। ग्राम पंचायतों के पास रखे गए ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खराब हो चुके हैं। धानी ब्लॉक के अहिरौली के धनेश व पकरडीहा के आकाश तथा घुघली के बेलवा तिवारी के परमेश्वर तिवारी ने कहा कि उनके गांव में न तो निगरानी समिति सक्रिय है और न ही बचाव के प्रति कोई जागरूकता है।
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कोट--
सभी ब्लॉकों में निगरानी समितियों को सक्रिय करने के निर्देश सहायक विकास अधिकारी पंचायत को दिए गए हैं। इसमें शिथिलता मिली तो उनकी जवाबदेही तय होगी।
- यावर अब्बास, जिला पंचायत राज अधिकारी
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