एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं, वापस लौट जाते लोग
महराजगंज। जिला अस्पताल में चार दिन से एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। जरूरतमंद लोग जिला अस्पताल से वापस चले जा रहे हैं। जिला अस्पताल में दूर दराज से इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी हो रही है। मरीज व तीमारदारों ने कहा कि अगर समय रहते ही वैक्सीन मंगाई गई होती तो परेशानी नहीं होती।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, कुत्ता काटने पर अस्पताल में रोजाना करीब 12 से 15 मरीज आते हैं। सबसे अधिक परेशानी उन्हें हो रही है, जिन्हें पहली डोज लगनी है। दूसरी डोज लगवाने वाले भी वापस चले जा रहे हैं। बीते चार दिन से एआरवी नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है।
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लार व्यक्ति के खून में मिल जाता है
डॉक्टर कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रेबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रेबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुलन को खराब कर देता है।
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ऐसे लगती है एआरवी
रेबीज रोग की रोकथाम के लिए एंटी रेबीज वैक्सीन है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है। हालांकि एहतियात के तौर पर ऐसे मरीज को पहला इंजेक्शन तुरंत लगवा लेना चाहिए।
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बाहर महंगा मिलती है वैक्सीन
केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अशोक चौरसिया ने बताया कि एंटी रैबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लगवाने के लिए करीब 2,000 रुपये खर्च होते हैं। पूरा कोर्स पांच इंजेक्शन का होता है। यह टीका लगवाने पर व्यक्ति पूरे एक साल रैबीज से मुक्त हो जाता है। यानी एक साल के भीतर उसे दोबारा से कुत्ता, बंदर, लंगूर काट ले तो उसे फिर से एआरवी लगवाने की आवश्यकता नहीं होती।
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अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। इससे परेशानी हो रही है। दो दिन से पूछने आ रहा हूं कि आरवी कब आएगी। बाहर से एआरवी खरीदने पर महंगे दाम पर मिलेगी। अस्पताल में मुफ्त में लग जाती है।
सुरेंद्र चौहान, मिठौरा
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तीन बार लग चुकी है, लेकिन चौथी बार लगवाने आया तो पता चला की एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टाक समाप्त हो चुका है। अगर जल्दी आ जाती तो समस्या नहीं होती।
- उपेंद्र, बरगदवा
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दो इजेंक्शन लग चुका है। चार अप्रैल को ही तीसरा लगना था, लेकिन अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि अभी एआरवी नहीं है। पता नहीं कब जाएगी, कोई गारंटी नहीं है। जब वैक्सीन आएगी तो लगवाई जाएगी7
- उत्तरी चंद, बड़हरामीर
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एआरवी का स्टाक नहीं है। इसके लिए मांग की गई है। ज्योंही स्टाक मिला, त्योंही सुई लगानी शुरू कर दी जाएगी। आने वाले लोगों का बेहतर ढंग से इलाज कराने का प्रयास जारी है।
- शैलेष मिश्रा, चीफ फर्मासिस्ट
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जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर ढंग से स्वास्थ्य सुविधा दी जा रही है। एआरवी जल्दी उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया गया। आते ही समस्या दूर हो जाएगी।
-डॉ. एएम भाष्कर, सीएमएस