महराजगंज/निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत निचलौल वन रेंज क्षेत्र के जंगलों की आबोहवा के बीच स्थित दर्जीनिया ताल में मगरमच्छों का घर बना है। ठंड शुरू होते ही उन्हें देखने के लिए ताल पर हर रोज पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है। विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते इस ठंड में बदहाल व्यवस्था के बीच पर्यटकों को मगरमच्छ देखने के लिए मिलेगा, क्योंकि ताल के आसपास पर्यटकों के लिए बने बेंच व पाथ-वे बेकार हो चुके हैं। इतना ही नहीं ताल के बीच बने टीले भी बेकार हो चुकी है।
दर्जिनिया ताल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए साल 2016 में शासन ने 14 लाख पचास हजार रुपये अवमुक्त किए थे। उसके बाद विभाग के उच्चाधिकारियों की निगरानी में ताल के सुंदरीकरण, पर्यटकों के बैठने सहित अन्य व्यवस्था कराई गई थी। ताल के बीच में मगरमच्छों को देखने के लिए वाच टावर बनाने के लिए भी दो लाख रुपये खर्च किए गए थे। बावजूद इसके पर्यटन स्थल दर्जीनियां ताल वीरान हो चुका है, क्योंकि वर्तमान में पर्यटकों के लिए ताल पर बने बेंच, वाच टॉवर, साफ सफाई सहित अन्य सुविधाएं बदहाल हो चुकी हैं।
निचलौल रेंजर सुनील राव ने कहा कि दर्जिनिया ताल की साफ-सफाई व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। धन नहीं मिलने की वजह से ताल का कार्य नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं शुल्क देकर ताल पर आने वाले पर्यटक बदहाल व्यवस्था देख नाराजगी जताते हुए वापस लौट जाते है। रकम मिलने के बाद ताल पर बेहतर व्यवस्था कराई जाएगी।
-
मगरमच्छों को देखने के लिए आते हैं पर्यटक
जिले में पर्यटन स्थल के रूप में चर्चित दर्जिनिया ताल के मगरमच्छों को देखने के लिए दूर-दराज गांवों से लेकर पड़ोसी जिला कुशीनगर व नेपाल से पर्यटक आते हैं। लेकिन वर्तमान समय मे ताल बदहाल हो चुका है। ऐसे में अब यहां पर्यटकों की संख्या भी कम हो चुकी है। माना जा रहा है कि ठंड के दिनों में ताल से मगरमच्छ धूप सेंकने के लिए ताल के बीच टीले पर निकलते हैं। जिन्हे देखने के लिए पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगी।
दर्जिनिया पर पर्यटकों का घूमने का सही समय
जंगलों और नारायणी नदी के किनारे स्थित दर्जिनिया ताल पर घूमने और मगरमच्छों को आसानी से घंटों तक देखने के लिए नवंबर से मार्च का महीना सबसे बेहतर माना जाता है। ठंड के दौरान मगरमच्छ ज्यादातर समय रेस्टिंग आइलैंड (रेत के टीले) पर बिताते हैं। यहां मगरमच्छों को अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है।
-
पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले ताल में रहते है 450 मगरमच्छ
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दर्जिनिया ताल करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जिसमे करीब 450 मगरमच्छ रहते हैं। मनोरम वादियों के कारण यहां मगरमच्छों के लिए अनुकूल आबोहवा है। प्रत्येक वर्ष इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष हुई गणना में इनकी संख्या साढ़े तीन सौ थी। इस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर करीब साढ़े चार सौ के पास पहुंच गई है।