फरेंदा विकास खण्ड मुड़िला व झामट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया था। जहां पर मुड़िला से दो व झामट से दो प्रत्याशी अपना नामांकन दाखिल किये थे। नामांकन प्रक्रिया के बाद प्रमाण-पत्रों की जांच के दौरान मुड़िला के पुष्पा व सावित्री ने नामांकन किया था। जिसमें दोनों प्रत्याशियो का जाति-प्रमाण पत्र के अभाव मे नामांकन रद्द कर दिया। आरओ एसके वर्मा ने बताया कि अनुसूचित जनजाति का कोई प्रत्याशी अपना जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके कारण सभी लोगों का पर्चा खारिज कर दिया गया। अब इसकी जानकारी चुनाव आयोग को भेजी जाएगी। तब तक यह रिक्त पद माना जायेगा।
बिना जन जाति के आरक्षित कर दिया गांव
फरेंदा। विकास खण्ड के मुड़िला गांव में बिना अनुसूचित जनजाति के परिवार के बिना ही इस गांव को अनुसुचित जन जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। इससे आरक्षण प्रक्रिया के सर्वे करने वालों व गांव के जातिवार आवंटन करने वालों पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है।
जाति के सर्वे के समय ब्लॉक कर्मचारियों की लापारवाही सामने आई। फरेंदा विकास खण्ड के दो गांव मुडिला व झामट को अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित हुआ। झामट में एक ही परिवार के अनुसूचित जन जाति है। वही मुड़िला में एक भी परिवार नहीं है। फिर भी इस गांव को अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित किया गया। इस प्रक्रिया के खिलाफ गांव के दर्जनों लोग जिलाधिकारी व चुनाव आयोग को पत्र भेज कर आरक्षण में संशोधन करने की मांग किया गया था। लेकिन गांव वालों के पत्र पर कोई सुनवाई न करते हुए पुन: मुड़िला को अनुसूचित जन जाति के लिए चयन किया गया।