महराजगंज। मिलावट के खेल में अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे लोगों की सेहत खराब हो रही है। दूसरी ओर मिलावट करने वालों की चांदी है। कार्रवाई के दौरान धंधेबाज कुछ दिन खामोश रहते हैं, फिर अपना काम शुरू कर देते हैं।
सरकार की ओर से अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश है। विभाग की ओर से टीम समय-समय पर जांच कर करती है। मिठाई में मिलावट अधिक होता है। चमकीली पन्नी में लिपटी काजू बर्फी और मिल्क केक खरीदने से पहले सचेत रहने की जरूरत है।
मिठाई पर लगी चांदी समझ कर जिसे खरीदा जाता है, असल में वह एल्युमीनियम की परत (वर्क) हो सकती है। दरअसल, असली चांदी करीब 97 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है। इससे बने पेपर की कीमत भी एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ही आसपास आएगी।
इतना महंगा पेपर वर्क इस्तेमाल करने पर मिठाई का दाम भी बढ़ जाएगा। लिहाजा धंधेबाजों ने इसकी जगह एल्युमीनियम वर्क मंगाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एल्युमीनियम वर्क सेहत के लिए हानिकारक है।
इसे खाकर फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। यदि लंबे समय से ऐसी मिठाई का सेवन किया गया तो लिवर और किडनी खराब हो सकती है। वहीं दूसरी ओर चने के बेसन में भी मिलावट होती है।
सूत्रों की माने तो चना बेसन में भी मिलावटखोर मेटानिल पीले रंग की मिलावट करते हैं। धंधेबाजों ने नकली जीरा और नकली सौंफ बनाने के बाद अब नकली काली मिर्च भी बाजार में उतार दी है। मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। काली मिर्च बताकर बेचा जा रहा है, वह पिचका मटर है।
उस पर काली पॉलिश करके काली मिर्च बनाया गया है। मिलावटखोरी पकड़ में न आए, इसके लिए धंधेबाज असली काली मिर्च में 35 से 40 फीसदी नकली काली मिर्च को खपाते हैं। पाउडर वाले दूध से पनीर बनाया जा रहा है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से लोगों की सेहत पर इसका असर पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में पेट की समस्या से पीड़ित रामप्रकाश ने बताया कि पनीर का सेवन अधिक करता हूं। बीते सप्ताह से यह पेट संबंधी रोग हो गया है। डॉक्टर से दवा दी है। खाद्य पदार्थ शुद्ध नहीं होने के कारण यह समस्या हुई है। डॉक्टर ने परामर्श देने के दौरान इन बातों को बताया।
ज्ञानती देवी ने डायरिया की समस्या से पीड़ित होने की बात कही। उन्होंने बताया कि बीते दिन घर में बाजार से बेटे ने मिठाई लाई थी। उसे कई बार खा ली। इसके बाद से ही समस्या हो गई। अब तो बाजार में बिकने वाली खाद्य सामाग्री खरीदने में भी डर लगता है।
अभियान चलाकर जांच की जाएगी। शुद्धता को लेकर कारोबारियों को जागरूक किया जाता है। समय-समय पर जांच कर नमूना लैब में भेजा जाता है।
-डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा द्वितीय