अल्ट्रावायलेट फ्लोरोसेंट से लिखा मिलेगा नंबर, राजकीय माध्यमिक के प्रवक्ताओं को दायित्व
डीआईओएस ने 2025 में गठित समिति को 2026 के लिए भी किया सक्रिय
2025 में टीम का किया गया था गठन, फिर सक्रिय की गई टीम
महराजगंज। माध्यमिक स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों की डुप्लीकेसी को रोकने के लिए 2025 में गठित तीन सदस्यीय समिति को फिर से सक्रिय कर दिया गया है। समिति के सदस्य किताबों की बिक्री की निगरानी करेंगे। एनसीईआरटी ने नई किताबों पर अल्ट्रावायलेट फ्लोरोसेंट के लाल रंग से सीरियल नंबर प्रिंट किए हैं। इससे वास्तविक किताबों की पहचान आसान होगी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की तरफ से जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को शिक्षा सत्र 2026-27 में एनसीईआरटी की सस्ती पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। पाठ्यपुस्तकों के नाम पर फर्जीवाड़ा रोकने के लिए हर पुस्तक के कवर पेज पर अल्ट्रावायलेट फ्लोरोसेंट लाल रंग का सात अंकों का सीरियल नंबर होगा। साथ ही जिले के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को अधिक मूल्य वाली पाठ्य पुस्तक, गाइड बुक्स खरीदने के लिए बाध्य करने वालों पर कार्रवाई होगी। बोर्ड परीक्षा के बाद इसको लेकर अभियान चलाया जाएगा।
किताबों की डुप्लीकेसी रोकने के लिए डीआईओएस द्वारा गठित राजकीय प्रधानाध्यापकों की टीम में राजकीय माध्यमिक सिंहपुर के प्रधानाध्यापक अनमोल कुमार यादव, राजकीय बरवां राजा के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रसाद व वरिष्ठ प्रवक्ता रामजी प्रसाद के नाम शामिल हैं।
जिले में कुल 278 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को अब दुकानदार या स्कूल प्रशासन मनमानी तरीके से किताबें नहीं बेचेंगे। विद्यालयों में एक से 10 अप्रैल और एक से 15 जुलाई तक अधिकृत पुस्तकों की उपलब्धता बाजार में सुनिश्चित की जाएगी। विद्यालयों को किसी भी स्थिति में छात्रों को अतिरिक्त या गाइड पुस्तकों को खरीदने के लिए बाध्य करने की अनुमति नहीं होगी। अगर कहीं से भी इसकी पुष्टि होती है तो कार्रवाई तय होगी।
वर्जन
बाजार में एनसीईआरटी की किताबें ही बिकें व डुप्लीकेट किताबें न बिके इसके लिए 2025 में गठित राजकीय प्रधानाध्यापकों की टीम 2026 के लिए भी सक्रिय की जाएगी।
-प्रदीप कुमार शर्मा, डीआईओएस