बीमारी के हिसाब से दलालों को कमीशन देते हैं निजी अस्पताल
मरीजों को अस्पताल ले जाने वाले दलालों का नेटवर्क नेपाल तक फैला
महराजगंज। मरीजों को अस्पताल ले जाने वाले दलालों का नेटवर्क जनपद तक ही नहीं बल्कि नेपाल तक फैला हुआ है। वहां से मरीजों को लाकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। नेटवर्क में शामिल दलाल तीमारदारों को सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं होने की बात कहकर गुमराह करते हैं। मरीज की बीमारी के हिसाब से निजी अस्पताल दलालों को 5000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक कमीशन देते हैं।
सूत्र बतातें हैं कि मरीजों को अवैध अस्पतालों पर पहुंचाने में दलालों का अहम रोल है। इस खेल को समझने के लिए महिला अस्पताल का रुख करना पड़ा। शुक्रवार को महिला अस्पताल के पास एक युवक गेट पर खड़ा था। उसके साथ तीन महिलाएं भी इधर-उधर टहल रही थीं। करीब आधे के अंदर एक ऑटो में दर्द से कराहती हुई महिला को लेकर परिजन पहुंचे। उसे गेट से पहले ही युवक ने रोक लिया। किनारे खड़े होकर उसकी बातों को सुनने के दौरान हकीकत सामने आ गई।
युवक महिला के घर वालों को समझा रहा था कि सरकारी अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। मरीजों की जान भी जा सकती है। अपने परिचय के एक निजी अस्पताल का जिक्र किया तो मरीज के पक्ष से एक महिला ने विरोध किया। इसके बाद वह बातों के जाल में उलझाने लगा। करीब एक घंटे की माथापच्ची में दलाल अपने मकसद में कामयाब हो गया। उसने कहीं फोन किया तो एक युवक ऑटो में आया और मरीज को लेकर चला गया। यह प्रतिदिन महिला अस्पताल के पास होता है। खास बात यह है कि दलालों ने सीसीटीवी कैमरे की नजर से बचने की पूरी व्यवस्था कर रखी है। वे परिसर इस तरह से जाते हैं कि लगे मरीज को देखने जा रहे हैं। सिर्फ कुछ मिनट भ्रमण कर वे गेट की ओर चले आते हैं।
सूत्र बताते हैं कि नेपाल में भारतीय सीमा से सटे गांवों व चौराहों पर झोला छाप भी नेटवर्क में शामिल हैं। मरीज भेजने के एवज में सप्ताह में एक बार लिफाफे में उन्हें रकम भेज दी जाती है। महराजगंज से लेकर गोरखपुर तक निजी अस्पताल दलालों की नेटवर्क में हैं। सामान्य बीमारी से लेकर बड़ी बीमारी में अलग-अलग रेट तय है। यह मरीज की जेब से ही दलाल तक जाती है। पांच हजार, आठ हजार, दस हजार, पंद्रह हजार, बीस हजार रुपये तक अलग-अलग केस में मिलते हैं।
दलाल मरीजों को फंसाकर निजी अस्पताल पहुंचाते हैं। मरीजों को जांच और दवा के नाम पर भी शिकार बनाया जाता है। सस्ती दवा दिलाने का झांसा देने वाला केवल दवा का काम करता है। ब्लड की जांच, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए धंधेबाज मरीजों को शिकार बनाते हैं। जिसका जितना कमीशन होता है तय समय पर केस और पर्चे के हिसाब से पहुंचा दिया जाता है।
केस नंबर एक
20 जनवरी 2025 को महुअवा महुई गांव के विजय कुमार जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर पर गांव के कुछ लोग साथ पहुंचे थे। उनके पिता श्रीराम (65) बाइक की चपेट में आने से घायल थे। उनका आरोप है कि जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लेकर आया तो डॉक्टर से 3,500 रुपये का तीन इंजेक्शन बाहर से खरीदकर मंगाया। बाद में टांका लगवाने के बाद एक निजी अस्पताल में भेज दिया।
केस नंबर दो
नेपाल मर्चवार की शांति देवी को कुल्हे का ऑपरेशन करना था। वहीं एक व्यक्ति उनके घर के लोगों से मिला। उसने घर के लोगों को समझाया कि महराजगंज के एक निजी अस्पताल में सस्ते में इलाज करा देगा। उसने झांसा देकर महराजगंज में इलाज के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च करवा दिए। इलाज ठीक से नहीं हुआ तो गोरखपुर मेडिकल कालेज में इलाज कराना पड़ा।
वर्जन
अस्पतालों की जांच समय-समय पर की जाती है। बगैर लाइसेंस अस्पताल का संचालन किसी भी दशा में नहीं होने दिया जाएगा। अभियान चलाकर जांच की जाएगी।
-डॉ. वीरेंद्र कुमार आर्या, नोडल निजी अस्पताल एंड क्लीनिक