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मनरेगा में पांच फीसदी ही पाए 100 दिन काम

Mon, 13 Jan 2014 05:43 AM IST
Maharajganj
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महराजगंज। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत इस साल अब तक पांच फीसदी लोगों को भी 100 दिन का काम नहीं मिल पाया है। जबकि प्रशासन ने दिसंबर तक 41 करोड़ 61 लाख 99 हजार रुपये खर्च कर दिए हैं। 18 लाख 33 हजार 99 मानव श्रम दिवस का दावा किया जा रहा है।
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हर साल 100 दिन के काम की गारंटी देने वाली यह योजना मजदूरों को दो वक्त की रोटी मुहैया कराने में असफल रही है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2013 तक दो लाख 57 हजार 343 मजदूरों को जॉब कार्ड जारी किया। इसमें एक लाख 14 हजार 728 लोगों ने काम की मांग की। इसमें एक लाख 10 हजार 698 लोगों को ही काम दिया गया। इनमें भी केवल 502 लोगों को ही 100 दिन का काम मिल पाया। जबकि 18 लाख 33 हजार 99 मानव श्रम दिवस आयोजित करके 41 करोड़ 61 लाख 99 हजार रुपये खर्च कर दिए गए हैं। जबकि सच्चाई यह है कि गांव में काम नहीं मिलने पर लोग आएदिन जिला मुख्यालय पर अधिकारियों से काम मांगने पहुंचते हैं।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक ऋषिमुनि उपाध्याय का कहना है कि बीच में ही मजदूरों के काम छोड़ देने से वे 100 दिन का कार्य पूरा नहीं कर पाए हैं। बीच में पूरा बजट नहीं होने से भी यह दिक्कत आई है। अधिकांश ऐसे मजदूर हैं जो 80-90 दिन तक कार्य किए हैं। जो मजदूर 100 दिन तक कार्य करना चाहते हैं उन्हें अवश्य काम दिया जाएगा।
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विकास खंड वार मनरेगा की स्थिति
विकास जारी मांगा दिया 100
खंड कार्ड रोजगार काम दिन
बृजमनगंज 25069 8775 8528 40
धानी 6526 3753 3698 05
घुघली 19524 8906 8802 100
लक्ष्मीपुर 21141 10376 9917 52
महराजगंज 25564 12348 11974 38
मिठौरा 28481 10974 10260 37
नौतनवा 19514 10197 9592 36
निचलौल 23086 9346 9069 43
पनियरा 22748 9607 9288 48
परतावल 19732 9759 9610 60
फरेंदा 21644 10146 9815 25
सिसवा 24314 10541 10145 18
कुल 257343 114728 110698 502
मजदूरों के खाते में सीधे पहुंचेगी मजदूरी
ग्राम पंचायतों से वापस मांगी जा रही धनराशि
अब प्रदेश के खाते से मजदूर के खाते में भेजा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। मनरेगा मजदूरों को अब मजदूरी के लिए ग्राम प्रधानाें और ग्राम पंचायत अधिकारियों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। मजदूरी अब शासन स्तर से मजदूरों के खाते में सीधे भेेजी जाएगी। इसके लिए ग्राम पंचायतों से मनरेगा की धनराशि को वापस मंगाया जा रहा है। उम्मीद है फरवरी से मजदूरों के खाते में धनराशि पहुंचनी शुरू हो जाएगी। इसके पहले ग्राम प्रधान मजदूरों को चेक काटकर मजदूरी का भुगतान करते थे। इससे मजदूरों को कई महीनेेेे तक मजदूरी नहीं मिलती थी।
एक जनवरी 2014 से पूरे देश में इलेक्ट्रानिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (ईएफएमएस) लागू है। इसके तहत शासन स्तर से मजदूरों के खाते में मनरेगा मजदूरी सीधे भेजने का प्रावधान है। ग्राम पंचायत स्तर पर मनरेगा का काम होने के बाद उसकी एमआईएस फीडिंग कराई जाएगी। उसके बाद जिला ब्लॉक और जिला स्तर से उसे फारवर्ड करके प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। उसके बाद प्रदेश सरकार के मनरेगा के खाते से मजदूरों के खाते में सीधे धनराशि भेजी जाएगी। इससे मजदूरों को भागदौड़ नहीं करना पड़ेगा। इसके क्रम में मजदूरों के 65 प्रतिशत खातों को फ्रीज किया जा चुका है। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक ऋषिमुनी उपाध्याय ने बताया कि ग्राम पंचायतों में मनरेगा का जो पैसा शेष बचा है उसे वापस मंगाया जा रहा है। इसमें जनवरी का प्रशासनिक मद और सामग्री मद छोड़कर शेष धनराशि वापस कराने के लिए सभी बीडीओ का पत्र जारी किया गया है। धनराशि मिलने के बाद उसे प्रदेश सरकार के मनरेगा के खाते में भेजा जाएगा। उसके बाद मजदूरों का भुगतान वहीं से होता रहेगा। उम्मीद है कि फरवरी से मजदूरों को भुगतान होना शुरू हो जाएगा।
140 की जगह 100 रुपये दी जा रही मजदूरी
महराजगंज। मनरेगा के प्रति अधिकारी कितने गंभीर हैं इसका नमूना कहीं और नहीं मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के सामने लिखे नारा से दिख जाएगा। मनरेगा मजदूरों की मजदूरी 140 रुपये है लेकिन विकास भवन से मजदूरों को 100 रुपये मजदूरी दी जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के सामने बाई ओर दीवार पर 100 रुपये मजदूरी पाओ सेक्रेटरी से नाम लिखवाओ का नारा लिखा गया है। इससे मजदूर भ्रम हैं कि असली मजदूरी क्या है। कई साल पहले इस स्लोगन को लिखवाया गया था जिसे अब तक नहीं मिटाया गया है। जबकि मनरेगा के प्रचार-प्रसार के लिए भारी भरकम रकम भी खर्च की जाती है।
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