निचलौल। निचलौल तहसील क्षेत्र के गड़ौरा में स्थित जेएचवी सुगर मिल के प्रबन्ध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर मामले में दर्ज मुकदमे में निचलौल पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पुलिस ने अधिवक्ताओं का बयान दर्ज किया। मिल प्रबंधन से भी जानकारी जुटाई।
किसानों के 30 करोड़ 1 लाख 90 हजार पुराने गन्ना मूल्य बकाया भुगतान को लेकर प्रदेश सरकार के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने अगस्त 2013 में आरसी जारी की थी। मिल प्रबन्धन ने किसानों का बकाया भुगतान नहीं किया। इस पर तहसील प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मिल के चीनी गोदाम में ताला लगा दिया था। मिल प्रबंधन ने तहसील प्रशासन को शपथ पत्र देकर प्रशासन से बंद गोदाम को खोलवाने का अनुरोध किया गया। शपथ पत्र में किसानों का बकाया भुगतान करने के बाद मिल चलाने की बात कहीं थी। मिल प्रबंधन ने गोदाम खोलने के बाद किसानों का बकाया मूल्य भुगतान नहीं किया। तहसील प्रशासन ने मिल प्रबंधन की ओर से दिए गए शपथ पत्र की जांच की। इसमें हस्ताक्षर फर्जी पाया गया। इस मामले में तहसील प्रशासन ने मिल के प्रबन्ध निदेशक जवाहर जायसवाल के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा पंजीकृत करा दिया था। मुकदमे की विवेचना में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने हस्ताक्षर प्रमाणितकर्ता अधिवक्ता और नोटरी अधिवक्ता का बयान दर्ज किया है। इस संबंध में विवेचक थानाध्यक्ष रमांशकर यादव ने बताया कि प्रबंध निदेशक ने किसानों का बकाया गन्ना भुगतान करने के लिए शपथ पत्र दिया था। शपथ पत्र के शर्तों के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। तहसील प्रशासन की ओर से दर्ज मुकदमे की जांच की जा रही है।