महराजगंज। शहर के दो मोहल्लों को जोड़ने वाला बलिया नाले का पुल 15 साल में भी नहीं बन सका। इसकी फाइल शासन में धूल फांक रही है। इस पर अब तक 99 लाख से अधिक रुपये खर्च हो चुके हैं। तीन पिलर भी बन चुके हैं। फिर भी अधूरा पड़ा है। अब रिवाइज एस्टीमेट शासन में भेजा गया है। मगर, इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सुभाष नगर और पड़री मोहल्ले को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण बलिया नाले का पुल अधर में लटका है। पुल बनाने की मंजूरी वर्ष 2009 में बसपा सरकार में मिली थी, उस काम शुरू हुआ तो तीन पिलर बनकर तैयार हो गए। यह काम पूरा होने में 99 लाख रुपये खर्च हो गए। शुरुआत में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को कार्यदायी संस्था बनाया गया था। जब पुल का ऊपरी हिस्सा नहीं बन सका तो वर्ष 2011 में लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद से सिर्फ पत्राचार होता रहा।
बताया जाता है कि अब तक करीब 12 बार पत्राचार हो चुका है। मगर, परिणाम सामने नहीं आया। विभाग का दावा है कि नए साल में बजट मिलने की उम्मीद है। एक बार फिर साढ़े चार करोड़ रुपये के संशोधित बजट के साथ फाइल शासन को भेजी गई है। इस पुल में पहले एप्रोच के आगे सड़क को शामिल नहीं किया था। बाद में सड़क भी शामिल होने से बजट बढ़ गया।
जानकार बताते हैं कि समय बीतने के बाद निर्माण की लागत बढ़ी तो प्रोजेक्ट में कुछ बदलाव कर दिया गया। इससे इसकी लागत बढ़कर करीब साढ़े चार करोड़ रुपये हो गई। बजट को फिर से संशोधित किया गया। पूरी फाइल तैयार कर शासन को भेज दी गई। यहीं से व्यवस्था में उदासीनता दिखने लगी। हर बार पत्राचार होता रहा, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अधिकारी भी पत्र भेजकर किनारा कस ले रहे हैं।
यह पुल बाईपास का भी करेगा काम बलिया नाले पर बनने वाला पुल यदि तैयार हो जाए तो करीब 20 हजार की आबादी को आवागमन में सुविधा हो जाएगी। दोनों तरफ के मोहल्लों के लोगों की आने-जाने में चार से पांच किमी की दूरी कम हो जाएगी।
यह पुल बाईपास का भी काम करेगा। इससे शहर में लगने वाला जाम काफी हद तक कम हो जाएगा।