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Maharajganj News: 2.84 लाख निष्क्रिय खातों में 67 करोड़ डंप...खाताधारकों को ढूंढ़ कर देंगे रकम

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महराजगंज। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुरू किए गए विशेष अभियान “आपकी पूंजी आपका अधिकार” के तहत निष्क्रिय खाताधारकों को उनकी रकम लौटाने की कवायद शुरू कर दी गई है। जिले में 10 वर्षो से निष्क्रिय पड़े लगभग 2,84,103 खातों में करीब 67 करोड़ रुपये जमा हैं। जिला प्रशासन और अग्रणी बैंक की निगरानी में सभी बैंकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ब्लाॅक स्तर पर विशेष शिविर लगाकर खाताधारकों की पहचान कर राशि लौटाने की पूरी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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जिला अग्रणी बैंक कार्यालय के मुताबिक, जिले में संचालित 13 पंजीकृत बैंकों में बड़ी संख्या में ऐसे खाते हैं जिनमें दस वर्षों से कोई लेन-देन नहीं होने के कारण उन्हें ‘निष्क्रिय’ की श्रेणी में डाल दिया गया है। इन खातों में जमा राशि लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई गई और बिना दावा किए पड़ी रही। आरबीआई ने इस रकम को उसके सही मालिक तक पहुंचाने की कवायद तेज कर दी है। लीड बैंक के अनुसार, जिले में आम जनता के 2,76,141 निष्क्रिय खातों में 59.78 करोड़ रुपये जमा हैं। इसके अलावा स्कूलों और निजी संस्थानों के 1,979 खातों में 1.18 करोड़ रुपये पड़े हैं। सरकारी विभागों से जुड़े 1,929 निष्क्रिय खातों में 4.26 करोड़ रुपये जमा हैं। अन्य श्रेणी के 4,354 खातों में 1.79 करोड़ रुपये वर्षों से डंप पड़े हैं। इन सभी खातों में कुल मिलाकर करीब 67 करोड़ रुपये जमा राशि है।
आरबीआई के निर्देशानुसार, जिले के सभी ब्लॉकों में बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में संबंधित बैंक के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे, जो निष्क्रिय खातों की सूची के आधार पर खाताधारकों की पहचान करेंगे और उनके दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। इसके बाद उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। प्रमाण पत्र में यह उल्लेख रहेगा कि किस बैंक में उनके नाम से कौन सा खाता निष्क्रिय है, उसमें कितनी राशि जमा है और कितने समय से उस खाते में लेन-देन नहीं हुआ है। खाताधारक द्वारा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने पर बैंक अधिकारी मौके पर ही खाते को पुनः सक्रिय करेंगे या आवश्यकता होने पर नई प्रक्रिया पूरी कराकर धनराशि उपलब्ध कराएंगे।
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बैंककर्मी करेंगे घर-घर संपर्क
: अभियान को प्रभावी बनाने के लिए बैंककर्मियों को निर्देश मिला है कि वे निष्क्रिय खाताधारकों के पते और मोबाइल नंबर के आधार पर सीधे उनसे संपर्क स्थापित करें।
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