परिवहन निगम की बसों में पकड़ा जा चुका है कई बार मिलावटी खोआ
गांजा या अन्य अवैध वस्तुएं भी रखकर कोई भेज दें, तब भी नहीं होगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। परिवहन निगम की बसें अवैध रूप से सामान की ढुलाई का माध्यम बन गई हैं। फिर चाहे गत्ते या बोरे में गांजा, मिलावटी खोआ हो या अन्य कोई सामान। परिवहन निगम की तरफ से बसों में गत्ते, बोरे या बक्सों में ढोए जा रहे सामान की जांच नहीं की जाती है कि यात्री अथवा सामान भेजवाने वाले शख्स ने उसमें क्या रखा है। परिवहन निगम के चालक व परिचालक इतना बड़ा जोखिम सिर्फ 50-80 रुपये अथवा एक यात्री के किराये के दाम में उठा लेते हैं।
शनिवार की दोपहर 12 बजे कसया रोडवेज बस स्टेशन पर एक लाइन से बसें खड़ी थीं। इसी में से एक बस गोरखपुर जाने के लिए तैयार थी। सवारी बैठे थे और परिचालक आवाज दे रहा था हाटा, गोरखपुर बस चलने वाली है। तभी एक व्यक्ति आया और परिचालक के पास जाकर पूछा, भाई एक सामान गोरखपुर ले जाना है। तपाक से जवाब आया, रख दीजिए, 50 रुपये लगेंगे। हकीकत जाननी थी तो यह भी पूछना पड़ा, भाई कहीं यह तो नहीं बताना पड़ेगा कि इसमें क्या है।
जवाब आता है, नहीं भाई, रुपये दो, समय बर्बाद मत करो। फिर परिचालक की सीट के पास गया तो पहले से सामान भरा हुआ था, उसने पूछा कहां रखूं। तभी परिचालक ने चालक के बगल वाली सीट के पास खड़े एक यात्री को वहां से हटा दिया। बोला जाओ, पीछे और वहीं पर सामान रखवा दिया। खैर मैंने (रिपोर्टर) खाली डब्बा ही रखा, लेकिन तस्कर और बदमाश ऐसी ही लापरवाही और ऊपरी कमाई के लिए सभी नियम-कानून तोड़ने का फायदा उठा रहे हैं।
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परिचालक-चालक को सिर्फ रुपये से मतलब
बिना बुकिंग के सामान को ढोने में रोडवेज का सीधा नुकसान तो कुछ नहीं है, लेकिन बदमाश कोई घटना करना चाहें तो उसे रोका नहीं जा सकता है। क्योंकि महज 50 रुपये से ही रोडवेज के लोगों को मतलब है। 50 रुपये तो कम दूरी के होते हैं। अगर, दूरी अधिक होती है तो फिर रुपये भी ज्यादा देने पड़ते हैं। जनहानि पहुंचाने के लिए यदि कोई विस्फोटक रख दे तब भी चालक-परिचालक शायद पहचान न कर पाएं।
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80 रुपये में गोरखपुर से पडरौना पहुंच जाता है सामान
शनिवार की दोपहर 2ः18 बजे गोरखपुर से एक बस पडरौना डिपो पर आई। यात्री उतर गए। इसी में पांच लोगों का गत्ते में पैक सामान भी था। दो लोगों का सामान परिचालक ने अपने पास रख रखा था। वह दे दिया। इसके बाद तीन गत्ते का सामान पीछे बाॅक्स से निकालकर दिया। सामान लेकर जाने वाले लोगों ने बताया कि 80 रुपये में सामान गोरखपुर से आ जाता है। यही हाल गोरखपुर जाने वाली बस में भी था।
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खुद की कमाई के लिए फेल कर दिया कूरियर का सिस्टम
जानकार बताते हैं कि रोडवेज ने कूरियर सिस्टम भी लागू किया था। कुछ साल पहले कार्गो नाम की कंपनी को काम दिया गया था। तब बाकायदा सामान की बुकिंग होती थी और तय रेट पर सामान भेजे जाते थे। बुकिंग के पहले सामान की जांच होती थी। इस सिस्टम से सरकार को फायदा था, लेकिन अफसरों की जेब नहीं भर पाती थी। इस वजह से इतनी जांच पड़ताल की जाती थी कि लोग इससे दूरी बनाने लगे। फिर इसे घाटे का सौदा बताकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई और इस सिस्टम को बंद कर अवैध धंधे काे पनपा दिया गया।
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ऐसे पकड़ा गया अवैध धंधा
दोपहर 12 से दो बजे के बीच रेलवे बस स्टेशन पर पड़ताल के दौरान एक व्यक्ति गत्ता में सामान लेकर पहुंचा। इस दौरान कई बसों के परिचालकों ने उसे घेर लिया और पूछने लगे कि सामान कहां ले जाना है तो उसने गोरखपुर बताया। इसके बाद गोरखपुर जाने वाली बस के परिचालक ने व्यक्ति से गत्ता लेकर पैसे लिए और उसे अपना मोबाइल फोन नंबर देकर सामान को बस में रख दिया। इसी तरह देवरिया जाने वाली बस के चालक और परिचालक सामान को बसों में रखवाते मिले।
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बस डिपो के पास पकड़े जा चुके हैं गांजा तस्कर
सदर कोतवाली पुलिस छह माह में तीन तस्करों को बस डिपो के पास से गांजा के साथ पकड़ चुकी है। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि वह बस के माध्यम से गांजा की तस्करी करते हैं। तस्करों ने बताया था कि वह बिहार जाने वाली बसों में गांजा को पैक कर रुई या किसी अन्य सामान में रखकर बोरा से बांध देते हैं। बस की डिकी में रखवा देते हैं।
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ऑटो में भी पकड़ी गई गांजा तस्करी
20 मई 2022 को तरयासुजान की पुलिस ने ऑटो में तीन व्यक्तियों के पास से 60 किलो गांजा बरामद किया। वह सभी एक-एक किलो के पैकेज में गांजा को रखकर गोरखपुर जाने की तैयारी में थे। तीनों तस्करों ने बताया था कि बस से गांजा गोरखपुर भिजवा देते हैं, ताकि कोई व्यक्ति पकड़ा न जा सके।
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कोट
बस में सिर्फ यात्री ही सामान ले जा सकते हैं। अगर चालक और परिचालक बिना यात्री के सामान बसों में लाद रहे हैं तो यह गलत है। कई बार बस में गांजा व शराब पकड़ी जाती है, जिस पर संबंधित परिचालक पर कार्रवाई की गई है।
-बिंदू प्रसाद, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, पडरौना डिपो