महराजगंज। मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली चोरी करने वालों पर अब विद्युत निगम की ओर से शिकंजा कसने शुरू कर दिए गए हैं। निगम की ओर से नई तकनीक के अंतर्गत अब एंड्राड मोबाइल से बिजली मीटर में आ रही रीडिंग के अनुसार ही बिजली का बिल बनाया जाएगा। इससे बिजली चोरी पर पर लगाम लगाई जा रही है। मीटर में छेड़छाड़ होने पर नया मीटर लगने तक उस मीटर की रीडिंग से बिजली का बिल नहीं बन सकेगा।
विद्युत निगम की ओर से जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए मीटरों की तकनीकी प्रणाली और मीटर की रीडिंग प्रक्रिया में कई तरह के बदलाव किए गए हैं। करीब पांच वर्ष पहले तक पुरानी प्रणाली के काले मीटरों से विद्युत रीडिंग लेकर बिल बनाए जाते थे। शुरुआती दौर में यह काले मीटर भी निगम में अपनी विश्वसनीयता बनाए रखे थे, लेकिन इन मीटरों की विश्वसनीयता धीरे-धीरे समाप्त होने लगी है और अब पुराने मीटर बदलने का कार्य भी चल रहा है। क्योंकि पुराने मीटर में छेड़छाड़ बढ़ गई है। इसे देख उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने धीरे-धीरे सख्ती की। जिससे बिजली चोरी पर रोक लगाई जा सके। कारपोरेशन की ओर से विद्युत बिलिंग में पारदर्शिता बनाने के लिए एंड्रॉड मोबाइल से बिल बनाने की तकनीक शुरू की गई है। इसके चलते अब मीटर रीडर एंड्राड मोबाइल से उपभोक्ता के मीटरों की फोटो लेकर ही उस मीटर की रीडिंग को मशीन में फीड करेगा। इसके बाद ही विद्युत बिल बन सकेंगे। यदि मीटर खराब है या फिर रीडिंग लेने में कोई दिक्कत आ रही है तो उस मीटर को हटवाया जाएगा। नया मीटर लगाने के बाद ही उसकी विद्युत बिलिंग हो सकेगी। ऐसे में एड्रॉड मोबाइल से मीटर की रीडिंग की नई तकनीक जिले में शुरू हो चुकी है। अधिशासी अभियंता हरिशंकर ने बताया कि एंड्राड मोबाइल से विद्युत बिलिंग का कार्य शुरू हो गया है। इससे बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि बिजली बिल जमा करने के लिए उपभोक्ता अपने नजदीक के कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर बिजली बिल जमा कर सकते हैं। बिल में गड़बडी को नजदीक के बिजली स्टेशन से दुरूस्त करा लें। एंड्राड मोबाइल से उन्हीं स्थानों पर बिलिंग होगी, जहां मीटर से छेड़छाड़ हुआ है। जिले में दो लाख 89 हजार 668 उपभोक्ता हैं। दो लाख 50 हजार इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाए गए हैं।