महराजगंज। पिछले वर्ष से पूरे देश में वक्फ संपत्तियों की जानकारी लेने का कार्य राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा है। वक्फ की घोषित पुख्ता संपत्तियों की जानकारी लेने के बाद गलत तरीके से वक्फ के नाम पर कब्जे की संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में लेने का कार्य भी कर रही है।
इसके लिए सभी जिलों में वक्फ की संपत्तियों के सर्वे की जिम्मेदारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को देकर राष्ट्रीय पोर्टल वामिक पर ब्यौरा अपलोड कर पूरा डाटा देने के निर्देश हैं। बावजूद जनपद से अभी तक इस राष्ट्रीय पोर्टल पर सिर्फ 173 संपत्तियों का विवरण ही दर्ज है जिसमें से अधिकतर का डाटा नहीं उपलब्ध होने का उल्लेख है। जबकि जनपद के विभागीय आंकड़ों में 344 संपत्तियों के रिकॉर्ड दर्ज हैं।
राष्ट्रीय वामिक पोर्टल को लाने के पीछे शासन की मंशा थी कि जो वक्फ के नाम से दर्ज संपत्ति हो वह सुरक्षित रहे और वक्फ के नाम पर बेनामी कब्जा समाप्त हो। प्रदेश वार और जिला वार इसके आंकड़े अंतिम पायदान पर तहसील स्तर से अपलोड कराना था, लेकिन महराजगंज जनपद में सिर्फ 173 सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने का ब्यौरा ही दर्ज है।
शिया वक्फ बोर्ड के नाम जिले में कोई संपत्ति दर्ज नहीं है। वामिक पोर्टल के मुताबिक सदर तहसील महराजगंज के अंतर्गत 72 संपत्ति दर्ज है। 61 मुतव्वली, आठ मैनेजमेंट कमेटी, 6 घर और एक ईदगाह है। इसी तरह नौतनवां में तीन का विवरण नाट इनफार्मेशन के रूप में दर्ज है। निचलौल के अंतर्गत सिर्फ एक संपत्ति दर्ज है। सर्वाधिक रिकॉर्ड फरेंदा तहसील का है। फरेंदा में 97 संपत्तियों का विवरण है। 96 मुतवल्ली ब्यौरा है। पूरे जिले में 5 मदरसा, एक मकतब, 12 मैनेजमेंट कमेटी, चार ईदगाह दर्ज हैं। इस तरह से जिले में अल्पसंख्यक विभाग में 344 संपत्तियों के रिकॉर्ड दर्ज हैं।