निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत निचलौल वन रेंज के सेंचुरी वन क्षेत्र के जंगलों से सटे होकर बहने वाली नारायणी (गंडक) नदी के साधु घाट पर नन्हे घड़ियालों ने जन्म लिया। वाइल्ड लाइफ और वन विभाग की देखरेख में 34 अंडों में से 33 बच्चे निकले हैं, जबकि एक अंडा नुकसान होने की वजह से बच्चा नहीं जन्म ले सका। अंडों से निकले सभी बच्चों को सुरक्षित नदी में छोड़ दिया गया है।
रेस्क्यू टीम में शामिल वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के परियोजना प्रमुख अरशद हुसैन ने कहा की उनकी टीम को करीब 45 दिन पहले सूचना मिली की, जंगल के किनारे नारायणी नदी के साधु तट पर घड़ियाल घोंसला बनाए हैं, जिनमें अंडे भी दिए हैं। सूचना के बाद वन कर्मियों और साधु घाट पर नाव चलाने वाले नाविक धर्मेंद्र की मदद से उनकी देखरेख की जा रही थी। वहीं नेस्टिंग समय पूरा होने पर शनिवार को घड़ियाल के अंडों से बच्चे निकलना शुरू हो गए हैं। इस दौरान 34 अंडों से 33 बच्चे बाहर निकले, जबकि एक अंडा प्राकृतिक रूप से तैयार न होने की वजह से खराब हो गया।
33 बच्चों को रेस्क्यू कर नदी में छोड़ दिया गया है। बताया कि घड़ियाल अप्रैल मई में अंडे देते हैं। एक मादा घड़ियाल 20 से 35 अंडे देती है, जो नदी किनारे ही रेत में अंडों को दबा देती हैं। अंडों से घड़ियाल के बच्चे निकलने के बाद करीब दो महीने तक घड़ियाल मादा अपने बच्चों की देखभाल करती है। इस दौरान बच्चों को भोजन मुहैया कराती है। दो महीने तक बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। इसके बाद बच्चों से दूर हो जाती है।
वन क्षेत्राधिकारी निचलौल सुनील राव, वाइल्ड लाइफ के सदस्य रविंद्र त्रिपाठी, वन कर्मी मोविन अली, अब्दुल हकीम सहित अन्य मौजूद रहे।
नारायणी में घड़ियालों का बढ़ रहा कुनबा
वन क्षेत्राधिकारी निचलौल सुनील राव ने कहा की नारायणी नदी में मौजूदा समय में करीब 500 घड़ियाल प्रजाति का कुनबा है। इसके अलावा नारायणी नदी से सटे दर्जीनिया ताल में भी करीब 400 मगरमच्छ मौजूद हैं। नारायणी नदी का पानी जलीय जीवों के लिए अनुकूल होने की वजह से हर प्रजाति के जलीय जीवों की बंश वृद्धि हो रही है। नारायणी नदी सबसे स्वच्छ और साफ होने की वजह से जलीय जीवों के जान के लिए खतरा नहीं रहता है। जंगल के किनारे नारायणी नदी और दर्जीनिया ताल में घड़ियाल, मगरमच्छ एवं अन्य जलीय जीवों की बढ़ोतरी होने से पर्यटन के क्षेत्र में भी बढ़ावा मिल रहा है।
अंडों से बच्चे जून के दूसरे सप्ताह तक बाहर आते हैं
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के परियोजना प्रमुख अरशद हुसैन ने कहा की अंडे से बच्चे जून के दूसरे सप्ताह तक बाहर आ जाते हैं। बच्चों के बाहर निकलने का दौर करीब 3 महीने तक चलता है। अंडे से बच्चे की मदर कॉल की आवाज आती है, जिसे सुनकर मादा घड़ियाल अंडों को फोड़कर बच्चों को अपने साथ पानी में ले जाती है। इस समय इन्हें निहारने के लिए वन्यजीव प्रेमी इन बच्चों की अठखेलियां देखने के लिए नारायणी नदी किनारे पहुंच रहे हैं।
70 साल तक जिंदा रहते हैं घड़ियाल
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के मुताबिक, घड़ियाल करीब 70 साल तक जीवित रहते हैं। यह मगरमच्छ की तरह का जीव है। लेकिन अपनी कुछ विशेषताओं से यह मगरमच्छों से कुछ अलग होता है। मगरमच्छ का मुंह चौड़ा होता है, और अंग्रेजी वर्णमाला के U शेप में खुलता है। जबकि घड़ियाल का मुंह नुकीला होता है और अंग्रेजी वर्णमाला के V शेप की तरह होता है। उम्र बढ़ने के साथ ही घड़ियाल के मुंह पर घड़ेनुमा आकृति बन जाती है, इसीलिए इसे घड़ियाल कहते हैं।