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ऐसे तो कैसे पढ़ेंगी बेटियां, बढ़ेगी बेटियां?

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स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पाईं 4,367 बेटियां
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बेसिक शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में सामने आई लापरवाही
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिले में बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ की मंशा पर पानी फिरता जा रहा है। अब भी जिले में 4,367 बेटियां स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच सकी हैं। बालिकाओं एवं किशोरियों को स्कूल भेजने में विभाग की रुचि कम होने की वजह से योजना पूरी तरह सफल होती नहीं लग रही है। बेटियों को पढ़ाने के दावों के हकीकत की पोल बेसिक शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में सामने आई है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में 11 से 14 वर्ष तक की 4,367 बालिकाएं स्कूल न जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजी गई। इसके बाद विभाग की नींद खुली। बेटियों को स्कूल जाने की प्रेरणा के लिए हर बार रैलियां निकालकर व गोष्ठियों का आयोजन कर जागरूकता का संदेश दिया जाता है, लेकिन इसका व्यापक असर नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि बेटियों की तालीम को लेकर जागरूकता नहीं आ रही है। बीएसए ने जिले में 12 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर स्कूल न जाने वाली बालिकाओं का नामांकन कराने का निर्देश दिया है। धानी ब्लॉक में 60 एवं फरेंदा की 151 बालिकाओं का नामांकन कराने के लिए कहा गया है। निर्देश के अनुपालन में लापरवाही होने पर कार्रवाई की चेेतावनी दी गई है। इसी तरह अन्य ब्लॉकों में भी बालिकाओं को स्कूल भेजने का निर्देश है। खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश है कि नामांकन कराने के बाद सूची कार्यालय को भेजें।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जगदीश शुक्ल ने बताया कि स्कूल न जाने वाली बालिकाओं की सूचना मिलते ही खंड शिक्षा अधिकारियों को वंचित बालिकाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित कर नामांकन कराने का निर्देश दिया गया है। जल्द ही बालिकाओं का नामांकन कर उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा।
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