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चुनाव के शोर में दब गया गन्ना किसानों का दर्द

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चुनाव के शोर में दब गया गन्ना किसानों का दर्द
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जिले में गन्ना किसानों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद गन्ना किसानों का दर्द चुनावी शोर में दब गया है। अब तो कोई उन्हें भुगतान दिलाने की बात भी नहीं कर रहा। जिले में बंद पड़ी चीनी मिलें किसानों के दर्द को और बढ़ा रही हैं। एक वक्त था, जब जिले में फरेंदा, घुघली, गड़ौरा में चीनी मिलें संचालित थीं, लेकिन वक्त के साथ ये चीनी मिले बंद हो गईं। जिससे गन्ना किसानों की माली हालत खराब होती चली गई। उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। जिले के 1,095 गांवों के करीब 48 हजार किसानों ने गन्ने की खेती की है। वर्तमान में सिसवा की आईपीएल चीनी मिल संचालित है। मिल की पेराई क्षमता प्रतिदिन 20 हजार क्विंटल की है। ‘अमर उजाला’ की टीम से गन्ना किसानों से अपनी पीड़ा का इजहार किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। बेटी की शादी 25 मई को है। जरूरी कार्यों को करने के लिए पर्याप्त रकम नहीं है। उधार लेकर व्यवस्था करनी पड़ रही है। जैसे जैसे बेटी की शादी की तिथि करीब आ रही है, चिंता बढ़ती जा रही है। अब ईश्वर से यही कामना है कि किसी तरह बेटी के हाथ पीले हो जाएं, फिर उधार चुका देंगे। अभी काफी तैयारी करनी है। जरूरी सामानों की खरीदारी भी अभी नहीं हुई है।
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यह पीड़ा निचलौल तहसील क्षेत्र के शीतलापुर भट्ठी टोला निवासी गन्ना किसान रामआसरे की है। बातचीत के दौरान पहले तो उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाया फिर अपनी पीड़ा सुनाने लगे। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के दर्द को कोई सुनने वाला नहीं है। वादे तो बहुत हुए लेकिन सभी रेत का टीला साबित हुए। अब तो कोई उनके दु:ख-दर्द पर बात ही नहीं करता। उन्होंने बताया कि जेएचवी शुगर मिल गड़ौरा पर उनका एक लाख 25 हजार रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है।
कलनही गांव के रहने वाले शैलेष कुमार पांडेय का जेएचवी शुगर मिल पर 75,000 रुपये बकाया है। उन्होंने कहा कि अब तो गन्ने की खेती से मोह भंग हो रहा है। यहां तो कोई गन्ना किसानों के हित की बात ही नहीं कर रहा है। ऐसा लगता है कि गन्ना किसानों की पीड़ा का एहसास किसी को नहीं है। बकाए का भुगतान पता नहीं कब होगा। जरूरी कार्यों को करने में परेशानी हो रही है। मिश्रौलिया गांव के रहने वाले इजहार अली का जेएचवी शुगर मिल पर 3 लाख 25 हजार रुपये बकाया है। उन्होंने कहा कि जिले में गन्ना किसानों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। नकदी फसल के रूप में गन्ने की खेती अब नुकसान का सौदा हो गया है। बकाया भुगतान कराने की बात हवा हवाई साबित हो गई। छितौना टोला गदहिला के रहने वाले दिलीप कुमार ने बताया कि जेएचवी शुगर मिल गड़ौरा पर उनका 2 लाख 80 हजार रुपये बकाया है। जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। उनका कहना है कि खेत में पड़ा गन्ना सूख रहा है। यही हाल रहा तो अब गन्ने की खेती नहीं की जाएगी।
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश यादव का कहना है कि गन्ना किसानों के बकाए के भुगतान के लिए प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र में गन्ने के उठान के लिए विभाग की ओर से प्रयास किया गया है। किसानों की समस्याओं के प्रति विभाग गंभीर है।
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गन्ना किसानों के बकाए पर एक नजर
जेएचवी शुगर मिल गड़ौरा पर गन्ना किसानों का 49.73 करोड़ रुपये बकाया है। वर्ष 2014-15 में किसानों का 22.92 करोड़ और 2017-18 का 26.81 करोड़ रुपये बकाया है। इसका भुगतान मिल प्रबंधन की ओर से नहीं किया गया है। इस वर्ष जेएचवी शुगर मिल बंद हो गई। इससे 48 हजार किसान प्रभावित हुए हैं। साथ ही मिल के 610 कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं। यह मिल 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन गन्ने की पेराई करती थी। मिल कर्मियों का 17.80 करोड़ रुपये बकाया है।
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