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शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूली वाले अनफिट स्कूल बसों में सफर असुरक्षित

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महराजगंज। अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने के बाद थी बच्चों स्कूल वाले जरूरी सुविधाएं नहीं दे रहे हैं। इसमें परिवहन व्यवस्था मुख्य हैं। स्कूलों के ज्यादातर वाहन अनफिट हैं। इन्हीं वाहनों से मासूमों लाया-लेजाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ ही किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग की नजर इधर नहीं है। किराए पर बस रखने वाले स्कूल संचालक हादसा होने पर बस मालिक पर ठीकरा फोड़ देते हैं। यही नहीं, बडे़ शहरों से रिजेक्ट बसों को यहां स्कूलों में चलाया जा रहा है। हालांकि कुछ स्कूलों में नई और मानक के अनुरूप बसें भी हैं।
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प्राय: देखा जाता है कि मानक से ज्यादा बच्चों को वाहनों बैठाया जा रहा है, दूसरे अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बाक्स नहीं होते हैं। बच्चों को बस मैजिक में ठूंसकर भर लेना और घर से स्कूल तक छोड़ना अब तो आदत सी बन चुकी हैं। चंद रुपयों की लालच में पुरानी बसों को स्कूल बस के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि हर साल एआरटीओ कार्यालय से फिटनेस ली जाती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि अभिभावक शुल्क में मोटी रकम देते हैं, फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता क्यों नहीं बरती जाती है। जनपद में ऐसे तमाम स्कूल हैं, जहां दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ समेत बडे़ शहरों व अन्य प्रदेशों से वाहन लाकर स्कूल बस के रूप में प्रयोग में लिया जाता है। वहां बसें कम दाम में मिल जाती हैं। एनओसी लेकर बसें चलने लगती हैं। पुरानी बसों के अलावा बस में सुरक्षा को लेकर सतर्कता नहीं बरती जाती है।
43 स्कूल वाहन अनफिट, संचालकों को नोटिस
एआरटीओ कार्यालय में जिले में 392 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इनमें कुछ बसें हैं तो ज्यादातर मैजिक हैं। इनमें 43 वाहनों को अनफिट माना गया है। संबंधित स्कूल संचालकों को एआरटीओ ने नोटिस जारी किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि फिटनेस को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चेंकिग के दौरान अनफिट वाहन चलते पाए जाने पर वाहन को सीज कर दिया जाएगा। साथ ही चालक और मालिक को नोटिस जारी कर जवाब तलब होगा। ऐसी बसों से अगर कोई हादसा होगा तो संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होती है।
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स्कूल बस के लिए मानक
स्कूल बस की प्रत्येक वर्ष फिटनेस जरूरी है
बीस साल बाद बस को कंडम घोषित कर दिया जाता है
बस निर्माण के बीस साल बाद न तो परमीट जारी होता है, न ही फिटनेस दिया जाता है
स्कूल बस की वैद्य आयु 20 वर्ष होती है
स्कूल बस या किसी भी बड़ी बस व ट्रक का परमिट पांच साल के लिए दिया जाता है

43 अनफिट बसों के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नोटिस जारी जवाब तलब किया गया है। जवाब संतोषजनक नहीं रहने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अनफिट बसों का संचालन किसी भी दशा में नहीं होने दिया जाएगा।
एसपी श्रीवास्तव, एआरटीओ, महराजगंज

सुविधा का रखें ख्याल
स्कूल संचालक जब शुल्क लेते हैं, तो उन्हे सुविधा का ख्याल रखना चाहिए। अधिकतर बसें पुरानी हैं। स्कूल प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस तरह की लापरवाही ठीक नहीं है।
ममता मोदनवाल, अभिभावक

चंद रुपयों के लिए लालच ठीक नहीं
चंद रुपयों के लिए पुरानी बस और मैजिक का प्रयोग ठीक नहीं है। अनफिट बस में सफर तो वास्तव में ठीक नहीं है। जब पूरा शुल्क जमा किया जाता है तो सुरक्षा को लेकर कोताही क्यों की जाती है। इस मसले पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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ध्यानचंद कश्यप, अभिभावक
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