बाली गांव में 20 फीसदी आबादी सर्दी, जुकाम से पीड़ित
निचलौल(महराजगंज)। सरकार की तरफ से कोरोना संक्रमण काल में ग्रामीण इलाकों में डोर टू डोर जांच करने का फरमान फिसड्डी साबित हो रहा है। स्थानीय विकास खेड क्षेत्र के बाली गांव में एक महिला की कोरोना से मौत के बाद जिम्मेदारों की आंख खुली। आननफानन गांव के पंचायत भवन पर जांच शिविर लगाकर 108 लोगों की जांच की गई। तीन लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। जिम्मेदारों ने दवा देकर होम क्वारंटीन कर दिया।
पड़ताल में पता चला गांव की करीब 20 फीसदी आबादी जुकाम, बुखार, खांसी और वायरल फीवर से पीड़ित है। बाली गांव के इद्रीश, त्रिलोकी भारती, दीपू पांडेय, प्रशांत पांडेय, सलामत अली, जितेंद्र तिवारी, शेखावत अली, मुस्तकीम अली ने बताया कि जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर सीमावर्ती ब्लॉक क्षेत्र के गांव बाली चौक मार्ग पर स्थित है। गांव की आबादी 1600 के करीब है। बीते दिनों पूर्व प्रधान की पत्नी की कोरोना से जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव के पंचायत भवन पर शिविर लगाकर महज 108 लोगों की जांच की गई थी। इस दौरान तीन लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार उन्हें दवा देकर भूल गए। न उनकी दोबारा जांच की गई, न स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली गई। लोगों का आरोप है कि गांव से करीब चार किलोमीटर दूर सीएचसी है। जहां पर उन्हें बेहतर तरीके से इलाज नहीं मिल पाती है। ऐसे में ग्रामीणों को जिला अस्पताल अथवा निजी चिकित्सालय जाना पड़ता है। गांव में जागरूकता की भी कमी है। हाल में हुई बारिश के कारण गांव में जलभराव एवं गंदगी के चलते संक्रमण फैलने की आशंका है। ग्राम प्रधान के पति गिरीश गौड़ ने बताया कि गांव में संक्रमण को रोकने के लिए पूरे गांव में सैनिटाइजेशन कराया गया है। बचाव के हर संभव उपाय हो रहे हैं।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी ने कहा कि पॉजिटिव मरीजों को दवा देकर मोबाइल फोन के जरिए समय-समय पर उनकी जानकारी ली जा रही है। आरोप बेबुनियाद है। संक्रमितों की हर संभव मदद की जा रही है। निगरानी समिति एवं रैपिड रिस्पांस टीम सक्रिय है।