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हरतालिका तीज आज, व्रत को लेकर उत्साहित महिलाएं

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हरतालिका तीज व्रत के लिए महिलाएं हैं उत्साहित
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फोटो:-
पूजा-पाठ की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही
अमर उजाला व्यूरो
महराजगंज/सिसवा बाजार। हरतालिका तीज का व्रत हिंदू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता है। यह व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है। आमतौर पर अगस्त या सितंबर में ही आता है। इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते हैं। सुहागन महिलाओं के लिए यह व्रत काफी मायने रखता है। शास्त्री सुशील चंद उपाध्याय के अनुसार इस व्रत की मान्यतां यह है कि अगर कुंवारी कन्याएं इस व्रत को करती हैं तो उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इस दिन महिलाएं और लड़कियां दिनभर निराहार रहती हैं। शहर से लेकर गांवों तक पूजा-पाठ की तैयारियां की जा रही हैं।
कस्बे के अल्कापुरम निवासी श्वेता सिंह ने बताया कि सुहागन स्त्रियों के लिए आज का दिन बहुत ही सौभाग्य का है। तीज का व्रत सुहाग को अखंड बनाए रखने रखा जाता है। जो अविवाहित हैं वह अपने लिए मन चाहा वर पाने के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती कैं। कस्बे की वार्ड नंबर 14 पोखरा टोला निवासी सुमन जायसवाल ने बताया कि तीज का पर्व करवाचौथ से भी कठिन है, क्योंकि करवाचौथ में स्त्रियां चांद देखने के पश्चात व्रत को तोड़ देती हैं। लेकिन हरतालिका तीज व्रत को पूरे दिन किया जाता है जिसे हम निर्जला व्रत भी कहते हैं।
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कस्बे के वार्ड नंबर 13 बैंक रोड अमरपुरवां निवासी अंकिता मद्धेशिया ने बताया कि इस व्रत की विशेषता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि सर्वप्रथम तीज व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर के लिए रखा था। इसी से हरतालिका तीज का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। कस्बे की अल्कापुरम मोहल्ला निवासी मोना जायसवाल ने बताया क ितीज व्रत की अनिवार्यता यह है कि इस व्रत को कुवांरी कन्याएं तथा सुहागिनें दोनों ही रख सकती हैं। लेकिन एक बार अगर आपने व्रत रख लिया तो जीवन पर्यन्त रखना पड़ता है। यदि कोई महिला गंभीर रोगी की हालत या बीमार है तो उसके लिए या दूसरी महिला या फिर पति को इस व्रत को रखना पड़ता है।
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