फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पॉलिथीन में अब भी बिक रहे सामान

विज्ञापन
पॉलिथीन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन




महराजगंज। बिगड़ती आदत और मुनाफा के चक्कर में बढ़ते प्रदूषण की चिंता दरकिनार होती दिख रही है। पॉलिथीन में सामानों की बिक्री और उसके उपयोग पर लगा प्रतिबंध कागजी साबित हो रहा है। बाजारों में पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। दुकानदार प्रशासन की उदासीनता का लाभ उठाकर खुलेआम पॉलिथीन में सामान बेच रहे हैं।
पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगने के तुरंत बाद जिस जोर शोर के साथ अभियान शुरू किया गया है, वह अब ठंडा पड़ गया है। प्रदेश की सरकार की तरफ से 15 जुलाई को 50 माइक्रोन से कम पॉलिथीन थैलियों की बिक्री व उपयोग पर पाबंदी लगा दिया गया था। लोगों यह मानने लगे थे कि इस कड़ाई के बाद पॉलिथीन के उपयोग पर अंकुश लगेगा। इस बीच 15 अगस्त से थर्माकोल के गिलास व अन्य सामानों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद 2 अक्तूबर से सभी प्रकार के पॉलिथीन व थर्माकोल के आइटमों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही गई थी। इसके पीछे शासन व प्रशासन की मंशा थी कि दुकानदार अपने पुराने स्टॉक को खपा लें और आम जनता भी इसके प्रति सचेत हो। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से प्रचार वाहन घुमाकर लोगों को जागरूक भी किया गया। शुरूआती दौर में तो प्रतिबंधित आइटम जब्त कर जुर्माना भी वसूले गए। लेकिन दो अक्तूबर के बाद से इस प्रतिबंध के मद्देनजर प्रशासन की तरफ से जिस तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए थी, वह शिथिल पड़ गई है। परिणामस्वरूप दुकानदार अब भी पॉलिथीन में ही ग्राहकों को सामान बेच रहे हैं। सब्जी, फल फूल व कई प्रकार के सामान पॉलिथीन की थैलियों में लोगों को ले जाते हुए किसी भी समय कहीं भी देखा जा सकता है। अधिशासी अधिकारी विरेंद्र कुमार राव ने कहा कि पॉलिथीन की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लागू है। इसे बेचने व उपयोग पर प्रतिबंध है। जल्द ही इसकी जांच पड़ताल शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीण इलाकों में नहीं दिख रहा असर
ग्रामीण क्षेत्रों में तो पॉलिथीन पर प्रतिबंध का प्रभाव ही नहीं दिखाई दे रहा है। सड़क के किनारे की कई दुकानों से लोगों को सामान खरीद कर पॉलिथीन में ले जाते देखा जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें