महराजगंज। जिले में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना का बुरा हाल है। वर्ष 2014 में गांधी जयंती पर शुरू हुई इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण कराया जाना है। पंचायती राज विभाग ने पिछले तीन साल में मात्र 53107 शौचालय का निर्माण किया है। जिले को पूरी तरह खुले में शौच मुक्त करने के लिए अगले तीन माह में करीब दो लाख शौचालय का निर्माण कराया जाना है। ऐसे में निर्माण की सुस्त रफ्तार देखते हुए लक्ष्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत ग्राम पंचायतों को खुले में शौचमुक्त ओडीएफ करना है। जिले में कुल 1246 राजस्व गांव है, जिसमें कुल दो लाख 56 हजार 605 शौचालय की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग को दी गई है। अधिकारियों की लापरवाही, मॉनीटरिंग की कमी से योजना के चालू होने के बाद से जनवरी 2018 तक महज 32 हजार 436 शौचालय निर्माण हुआ है। पूर्व में सरकार ने 31 दिसंबर 2017 तक लक्ष्य के सापेक्ष शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया था। बाद में अवधि बढ़ा दी गई। वर्ष 2016-17 में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण 32436 हुआ था। वहीं वर्ष 2015-16 में 11321 शौचालय बनवाया गया। वर्ष 2014-15 में 9350 शौचालय का निर्माण हुआ था। इस तरह तीन साल में 53 हजार 107 शौचालय बन चुके हैं।
अब 2 अक्टूबर 2018 तक लक्ष्य के सापेक्ष शौचालय का निर्माण होना है।
प्रभारी डीपीआरओ नित्यानंद ने बताया कि लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयास जारी है। संबंधित कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि समय से शौचालय निर्माण को पूरा करावें, जिससे जिले को खुले में शौचमुक्त बनाया जा सके।
आंगनबाड़ी और स्कूल में निर्माण की प्रगति खराब
स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी बेबी व चाइल्ड फ्रेंडली शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। स्कूलों में चाइल्ड फ्रेंडली 180 शौचालय का निर्माण और आंगनबाड़ी केंद्रो पर 200 बेबी फ्रेंडली शौचालय का निर्माण हुआ है, जिले में कुल 1478 प्राथमिक स्कूल है। वहीं 648 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। 3133 आंगनबाड़ी सेंटर हैं। ऐसे में निर्माण की प्रगति बहुत ही खराब है।