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स्कूल ड्रेस की सिलाई से समूहों को मिला रोजगार

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स्कूल ड्रेस की सिलाई से समूहों को मिला रोजगार
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पनियरा एवं मिठौरा क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं सिलेंगी ड्रेस
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। परिषदीय स्कूलों में बंटने वाली नि:शुल्क ड्रेस का सिलाई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करेंगी। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि रोजगार भी मिलेेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस बार अभी दो ब्लॉकों के चार समूहों को जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें प्रशिक्षण देने का कार्य अंतिम चरण में है। इसके बाद अन्य ब्लॉकों के समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर ड्रेस सिलाई का अवसर दिया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों को 7 हजार बच्चों का दो-दो सेट ड्रेस सिलने का लक्ष्य दिया गया है।
जनपद में 1,478 प्राइमरी एवं 646 जूनियर हाईस्कूल हैं। इन विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक 2 लाख 22 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन सभी विद्यार्थियों को शासन की ओर से नि:शुल्क ड्रेस दिया जाता है। एक विद्यार्थी को हर सत्र में दो सेट ड्रेस दिए जाते हैं। इसके लिए संबंधित स्कूल के प्रबंध समिति के खाते में रकम डाल दी जाती है। यह समिति बच्चों को ड्रेस मुहैया कराती है। अब स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्कूली बच्चों का ड्रेस तैयार करेंगी। सिलाई के बाद बच्चों को ड्रेस वितरित किया जाएगा। ऐसे में एक तो समूह की महिलाओं को काम मिलेगा, दूसरे बच्चों को उनकी शरीर की फिटनेस के हिसाब से ड्रेस भी मिल जाएगी। पनियरा एवं मिठौरा ब्लॉक के दो-दो स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का प्रशिक्षण अंतिम चरण में है। प्रशिक्षण के बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बच्चों का ड्रेस सिलने का काम करेंगी। जिले में 1,259 स्वयं सहायता समूहों का गठन हुआ है। ड्रेस वितरण के लिए निर्देश है कि स्कूल प्रबंध समिति बच्चों की दर्जी से नाप कराएगी और कपड़ा खरीदकर उसी नाप के अनुसार ड्रेस की सिलाई कराएगी। अभी तक बच्चों को सिले सिलाए कपड़े खरीदकर दे दिया जाते थे। इससे ड्रेस की गुणवत्ता भी प्रभावित होती थी। साथ ही सही माप न होने के कारण बच्चों को ड्रेस पहनने में परेशानी होती थी। अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा ड्रेस सिलने से यह समस्या दूर हो जाएगी। बच्चों को ड्रेस नाप के अनुरूप मिल जाएगी।
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डीसी एनआरएलएम रविंद्र वीर ने बताया कि दो ब्लॉकों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण देने के बाद अन्य ब्लॉकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रकार कार्यों के लिए समूह की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाता है ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके। इस व्यवस्था से बच्चों को गुणवत्ता युक्त ड्रेस मिलने के साथ ही समूहों को काम भी मिल जाएगा।
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