महराजगंज। बरसात आने में महज दस दिन शेष बचे हैं, मगर अभी भी करीब एक हजार किलोमीटर सड़कें बदहाल हैं। अगर समय रहते इन सड़कों को गड्ढ़ामुक्त नहीं कराया गया तो बरसात भर राहगीर समस्या झेलने को मजूबर होंगे। लोगों का कहना है कि मुख्य सड़कों पर तो छिटपुट मरम्मत कार्य कराया जा रहा है, मगर ग्रामीण सड़कें लावारिस छोड़ दी गई है। इसमें बहुत सी सड़कें ऐसी हैं जिसका टेंडर होने के बाद भी मरम्मत शुरू नहीं कराया गया है।
15 जून से बरसात माना जाता है। बरसात शुरू हो जाने के बाद पिच सड़क का निर्माण सही ढंग से नहीं हो पाता है। ऐसे में शासन भी 15 जून के पहले क्षतिग्रस्त सड़कों को गड्ढ़ामुक्त कराना चाहता है। मगर इन साल बहुत सी सड़कें बदहाल हैं। बरसात शुरू होने में महज दस दिन शेष बचे हैं, मगर बहुत ग्रामीण सड़कें बदहाल पड़ी हैं, जिस गड्ढे ही गड्ढ़े नजर आ रहे हैं। यात्री हिचकोले खाकर यात्रा करने को मजबूर हैं। लोगों को कहना है कि जिले की कुछ मुख्य सड़कों पर छिटपुट मरम्मत कार्य तो हो रहा है, मगर ग्रामीण सड़कें पूूरी तरह से बदहाल हैं। मुख्य सड़कों पर काम की स्थिति देखी जाए तो घुघली-शिकारपुर, कप्तानगंज-सिसवां-निचलौल-ठूठीबारी-नौतनवां, महराजगंज-निचलौल, जिला मुख्यालय परिसर, परतावल-भटहट आदि सड़कों पर कच्छप गति से काम होता दिख रहा है, मगर वहीं पर अधिकांश ग्रामीण सड़कें लावारिश पड़ी है। ग्रामीण सड़कों की गड्ढ़ामुक्त की बात करें तो बहुत ही सड़कें ऐसी हैं जिसका टेंडर भी आमंत्रित कर दिया गया था, मगर इसके बाद भी इन सड़कों पर अभी तक गड्ढामुक्त का कार्य प्रारंभ नहीं शुरू हुआ, जिससे लोगों में आक्रोश व्यक्त है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन कुमार ने बताया कि बजट के अभाव में कुछ ग्रामीण सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है, जबकि कुछ सड़कों पर काम चल रहा है। प्रयास है कि सड़क जल्दी से गड्ढ़ामुक्त हो जाय।
उपेक्षित ग्रामीण सड़कें
पुंरैना-परतावल मार्ग, पुरैना-चिउटहा, महदेवा-हरखा प्यास, लक्ष्मीपुर देउरवा, अंहया-मंगलपुर मार्ग, करमहिया-सोहास के अलावा अन्य सड़कों पर कार्य शुरू नहीं हुआ है। इन सड़कों से होकर आने जाने वालों को काफी परेशानी होती है।