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कहीं पाइप लाइन ध्वस्त तो कहीं बिजली अपूर्ति बंद

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महराजगंज। सरकार की अधिकांश योजनाएं कागज पर संचालित हो रही हैं। इसे इस रूप में समझा जा सकता है कि जिले में संचालित पेयजल की 28 योजनाओं में से सात परियोजनाएं दम तोड़ चुकी हैं। जिन गांवों में इन परियोजनाओं के तहत कार्य हुए थे, वहां की हालत और भी खराब हो गई है। किसी गांव में पाइप लाइन ध्वस्त क्षतिग्रस्त हो चुकी है तो किसी गांव में बिजली ही नहीं है। इन परियोजनाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए 91.50 लाख रुपये की आवश्यकता जताई जा रही है। इसके लिए शासन से धन मिलने का इंतजार हो रहा है।
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जिले की सबसे पुरानी पेयजल परियोजना धानी की है। जो वर्ष 1983-84 में शुरू हुई। इस परियोजना के तहत पहले आधा दर्जन मजरों में रहने वालों को जलापूर्ति होती थी। वहीं अब सिर्फ एक टोले को पानी मिल पा रहा है। चकदह गांव में लगे ट्यूबवेल से 19 मजरों के लोगों को जलापूर्ति होती थी। यह परियोजना अब लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रही है। इसके चलते संबंधित मजरों में जलापूर्ति मुश्किल हो गई। दो गांवों को जलापूर्ति के लिए स्थापित कोल्हुई की पेयजल परियोजना भी विद्युत आपूर्ति न मिल पाने की वजह से बंद पड़ी है। छह टोलों को जलापूर्ति के लिए लगी फरेंदा बुजुर्ग पानी की टंकी से मात्र चार टोलों के बाशिंदों को ही पानी मिल पा रहा है।
इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता एएन गुप्ता ने बताया कि 21 टोलों के लोगों को जलापूर्ति के लिए ग्राम मदरहा ककटही, 13 -13 टोलों के लोगों के लिए स्थापित कोटकंहरिया तथा सोंधी की पाइप लाइन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण कई जगहों पर जलापूर्ति भी बाधित है। सात पेयजल परियोजनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 91.50 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। रकम मिलते ही मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा। ताकि संबंधित जगहों पर जलापूर्ति व्यवस्था सुचारु हो सके।
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