महराजगंज। गुरुवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि शासन ने डीएम, एसपी समेत जनपदीय अधिकारियों को सुबह 9 बजे से जन सुनवाई का निर्देश दिया है परंतु शासन के इस निर्देश को जनपदीय अधिकारी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर थोप रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष श्रीभागवत सिंह ने कहा कि शासन के निर्देश को जिला स्तर पर तैनात अधिकारी नहीं समझ रहे हैं। कर्मचारियों को बेवजह 9 बजे दफ्तर बुलाया जा रहा है। यह उचित नहीं है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को प्रात: 9 बजे कार्यालय में उपस्थित होने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठन इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार सातवें वेतन आयोग के तमाम भत्ते जैसे एचआरए, शिशु भत्ता, परिवहन भत्ते केंद्रीय कर्मचारियों को दिए जा रहे हैं। लेकिन राज्य कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है। इस भत्ते को राज्य कर्मचारियों को भी दिया जाए।
जिला संयोजक घनश्याम पांडेय ने कहा कि तत्कालीन मुख्य सचिव के आदेश से 7 जुलाई 1975 से कर्मचारियों के लिए 10 बजे कार्यालय पहुंच कर कार्य शुरू करने और दोपहर में आधे घंटे अवकाश की व्यवस्था चली आ रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार में सरकारी कर्मचारियों को हर स्तर से परेशान किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के संप्रेक्षक अशोक पांडेय ने कहा कि अधिकारियों ने तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी सुबह 9 बजे ही कार्यालय आने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह कर्मचारी हित में नहीं है। कमलेश सिंह ने कहा कि जिले के कर्मचारियों में काफी आक्रोश है।
जिलाध्यक्ष जिला पंचायत कर्मचारी संघ ने कहा कि जिला पंचायत एवं स्थानीय निकायों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं हुईं। शासन ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर कर्मचारियों के साथ धोखा किया है। मातृशिशु कल्याण कर्मचारी संघ की आशा मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में अवकाश के दिन भी कर्मचारियों की जबरदस्ती ड्यूटी लगाई जा रही है। कर्मचारियों को नकदीकरण की सुविधा बहाल करने की मांग की। इस मौके पर एसएन सिंह, निर्मला, आश मिश्रा, सत्यनरायण, सतीश दूबे, आदित्य प्रताप, टीपी सिंह, आशुतोष मोहन शर्मा, वीरेंद्र पांडेय, आद्या दुबे, मो. हुसैन, त्रिभुवन, नंदलाल, धीरेंद्र सिंह, गोरखयादव, राम दयाल यादव, उमेश शाही, चंद्रशेखर वर्मा आदि मौजूद रहे।