काव्य की रसधारा के साथ लोक रंजन महोत्सव का समापन
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। लोक रंजन महोत्सव का अंतिम कार्यक्रम कवि सम्मेलन था। काव्य रसधारा के बीच लोक रंजन महोत्सव का समापन हुआ। कवियों ने काव्य रचना के जरिए राष्ट्रीय एकता-अखंडता पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में मलविका हरिओम ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। हमें तो ज्ञान का उपहार दें मां, सुरों में सत्य का झंकार दे मां...। इसके बाद अपर्णा त्रिपाठी ने महराजगंज की बेटी हूं, इसी भूमि की खेती हूं सुनाया तो तालियों की गूं्ज के साथ लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया। कवि नर कंकाल की रचना सुन पंडाल ठहाकों से गूं्ज उठा। उन्होंने कहा-इन बुजुर्गों को कब जुकाम हो जाय, कहीं ये आशाराम न हो जाएं...। इसके अलावा डॉ. घनश्याम देव, डॉ. परशुराम गुप्त, जमुना प्रसाद उपाध्याय, डॉ. आभा श्रीवास्तव, चेतना पांडेय, देवेश कुमार, मुमताज केशर, रविंद्र शर्मा, अंजना सिंह ने रचनाएं पढ़ीं। कार्यक्रम का संचालन इलाहाबाद से आए शैलेष माथुर ने किया। झारखंड से आए कलाकार विष्ण राजा की मनोहारी प्रस्तुत पर सभी मंत्रमुग्ध हो उठे।
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10 मिनट कार्यक्रम रुका रहा
महराजगंज। कार्यक्रम के दौरान अचानक बिजली खराब हो गई। इससे अधिकारी बेचैन हो गए। पंडाल में हो हल्ला होने लगा।10 मिनट के बाद बिजली आपूर्ति बहाल हो गई। इसके बाद कार्यक्रम शुरू हुआ।