पनियरा क्षेत्र में बिना सिल्ट निकली नहर।
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महराजगंज। जिले में इन दिनों नहरों में सिल्ट सफाई का काम चल रहा है, लेकिन सफाई के नाम पर ज्यादातर नहरों में कहीं-कहीं घास की ही कटाई कराई जा रही है। जिससे हर खेत को पानी पहुंचाने की बात बेमानी साबित होगी। कारण यह है कि एक तो नहरों में पानी पूरी क्षमता से बह नहीं पाएगा, दूसरे अधिकांश कुलावों का अस्तित्व समाप्त होने की वजह से हर खेत को पानी नहीं मिल पाएगा।
सिंचाई विभाग प्रथम इन दिनों करीब 1.10 करोड़ की लागत से 99 नहरों में करीब चार सौ किमी. नहरों की सिल्ट सफाई कराई जा रही है। सिल्ट सफाई का काम इन दिनों अंतिम दौर में चल रहा है। व्यावहारिक रूप से देखने को मिल रहा है कि अधिकांश नहरों में सिल्ट के नाम पर केवल नहर के दोनों तरफ उगी घास की ही कटाई कराई जा रही है।
राजीव नगर के रहने वाले पवन कुमार वर्मा ने बताया कि विभिन्न चौराहों व रोड क्रॉसिंग के दोनों तरफ सिल्ट सफाई की तस्वीर देखने को मिल रही है। अगर उन्हीं नहरों पर रोड क्रॉसिंग पर से दो-दो सौ मीटर दांए-बाएं की स्थिति देखी जाए तो तस्वीर कुछ अलग देखने को मिल सकती है। घुघली क्षेत्र के किसान गंगा पांडेय ने कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई हो रही है। सफाई के नाम पर केवल घास की कटाई हो रही है। जैसे तैसे काम करा कर रकम को हजम करने की व्यवस्था बनायी जा रही है। ऐसे तो हर खेत तक पानी बेहतर ढंग से नहीं पहुंच पायेगा। बभनौली गांव के कन्हैयालाल वर्मा ने बताया कि नहर की सफाई ठीक ढंग से नहीं कराई जा रही है। झाड़ियों को काटकर दायित्व की इतिश्री कर दी जा रही है। यह ठीक नहीं है। इस संबंध में सिंचाई खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता सुरेश कुमार ने कहा कि इस्टीमेट के अनुसार नहरों की सिल्ट सफाई कराई जा रही है। अगर कहीं शिकायत मिली तो उसकी जांच कराई जाएगी। वैसे मात्र 1.10 करोड़ की लागत से ही करीब 400 किमी. नहर से सिल्ट सफाई कराया जा रहा है। रही बात कुलावों का तो उसके रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। नहरों से सिल्ट सफाई की जांच के लिए शासन स्तर से भी गठित टीम कर रही है। टीम का स्पष्ट निर्देश है कि जिन नहरों में सिल्ट सफाई ठीक से मानक के अनुरूप नहीं होगा, उसके भुगतान पर रोक लगा दिया जाएगा। नहर की सफाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।