डीएलएड प्रशिक्षुओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना में संशोधन की मांग की
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। संयुक्त प्रशिक्षु मोर्चा के बैनर तले बीटीसी, डीएलएड प्रशिक्षुओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री को संबोधित सात सूत्री ज्ञापन डीएम को सौंप कर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की ओर से 28 जून को जारी अधिसूचना में संशोधन की मांग की है।
बीटीसी प्रशिक्षुओं ने कहा है कि निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत एनसीआरटी को न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है। एनसीआरटी ने 2010 में जारी अधिसूचना में एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को योग्य माना गया है। बीएड डिग्री धारियों को 6 से 8 तक अध्यापन के लिए योग्य माना गया है, लेकिन एनसीआरटी की ओर से 28 जून-2018 को जारी अधिसूचना में 23 अगस्त-2010 को संशोधित करते हुए प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में दो वर्षीय डिप्लोमा वाले अभ्यर्थियों के साथ-साथ बीएड अभ्यर्थियों को भी प्राथमिक विद्यालयों के लिए योग्य मान लिया गया है। प्रदेश में मौजूदा समय में दो लाख डीएलएड प्रशिक्षु बेरोजगार हैं। वर्ष-2019 में इनकी संख्या बढ़कर 5 लाख हो जाएगी। ऐसे में डीएलएड अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए सरकार 10 सितंबर-2012 में वर्णित शर्तों को उत्तर प्रदेश राज्य के परिप्रेक्ष्य में लागू रखा जाना लाखों प्रशिक्षुओं के हित में होगा। इस दौरान दामोदर कुमार वर्मा, लिखिल चंद्र, अमित रावत, आफताब आलम, मनीष वर्मा, लवकुश कुमार, राकेश कुमार, दीपक कुमार, संजय गांधी, अवधेश चौहान, राहुल अग्रहरि व रामचरित्र सिंह आदि मौजूद रहे।