महराजगंज। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में बांघों की गणना के लिए लगाए गए कैमरों में जहां लक्ष्मीपुर वन्य प्रभाग में तेदुओं की अच्छी खासी संख्या देखने को मिली, वहीं शिवपुर रेंज में लगे कैमरों में शेडयूल-एक का दुर्लभ वन्यजीव गौर भी कैद हुआ। सोहगीबरवां में गौर जैसे वन्यजीव की उपस्थिति देख प्रभागीय वनाधिकारी सुखद कर रहे हैं। दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी सोहगीबरवां की महत्ता बढ़ा रही है।
प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि मंगलवार को लक्ष्मीपुर लगे सात व शिवपुर में लगे नौ कैमरों का चिप निकाल कर परीक्षण किया गया। लक्ष्मीपुर के कैमरों में जहां तेदुओं की अच्छी खासी संख्या कैद हुई। वहीं शिवपुर मेें लगे कैमरे में शेडयूल-एक का वन्यजीव गौर कैद हुआ। गौर नामक वन्य जीव के बारे में प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि गौर नामक वन्यजीव को टाइगर जैसा संरक्षण प्राप्त है। यह वन्यजीव दक्षिणी पूर्वी एशिया में पाया जाता है। खास कर तराई के जंगलों में। नेपाल के चितवन, बिहार के बाल्मिकी नगर ब्याघ्र परियोजना में भी गौर नामक वन्यजीवों की उपलब्धता बताई जाती है। उन्होंने कहा कि गौर नामक वन्यजीव शाकाहारी होता है, जो भैंसे से बड़ा होता है। इसका वजन दस क्विंटल के आसपास होता है। गौर नामक वन्यजीव के शावक खास कर मादा गौर के साथ रहते हैं। नगर गौर अकेले विचरण करता है। अगर कोई इसे छेड़ने का प्रयास करता है तो वह आक्रामक भी हो जाता है। सोहगीबरवा में एक से एक दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी यह साबित करती है कि सोहगीबरवां में जैव विविधता का अकूत भंडार है। ऐसे में वन्यजीवों के संरक्षण संवर्धन की विशेष आवश्यकता है। वैसे सीमित संसाधनों से वन्यजीवों व वन संपदा के संरक्षण का काम किया जाता है।