नेपाल सरकार ने भारतीय कॉपी और किताबों पर दस प्रतिशत आयात ड्यूटी बढ़ा दी है। इसके चलते नेपाल के कारोबारियों ने भारत से कॉपी-किताबें मंगाना बंद कर दिया है। पहले एक बिल पर केवल 565 रुपये आयात ड्यूटी लगती थी, लेकिन नेपाल सरकार ने अपने राजस्व में बढ़ोतरी के लिए इसमें वृद्धि कर दी है।
भैरहवा के कॉपी-किताब के कारोबारी हरि न्योपने, विष्णु श्रेष्ठ, रामकृष्ण गौतम आदि ने बताया कि वे हर महीने गोरखपुर, बनारस और लखनऊ से भारी संख्या की धार्मिक पुस्तकें मंगाते थे। पहले केवल एक इनवॉइस पर 565 रुपये आयात ड्यूटी लगती थी, लेकिन अब नेपाल सरकार ने पूरे बिल पर दस प्रतिशत आयात ड्यूटी लगा दी है। किताबों के दाम बढ़ जाने से उन्होंने भारत से इसे मंगाना बंद कर दिया है।
ड्यूटी बढ़ने से अरबों का कारोबार हुआ प्रभावित
सोनौली। नेपाल सरकार के इस नए निर्णय से भारत और नेपाल दोनों तरफ सालाना अरबों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। भारत से कई कोर्स से संबंधित और धार्मिक पुस्तकें भारी संख्या में नेपाल जाती थीं। सालों से भारतीय कॉपी-किताबों के व्यवसाय में अपनी गहरी पैठ जमा चुके नेपाल के बड़े व्यापारी भी परेशान हो गए हैं।
नेपाल कस्टम के अनुसार सालाना करीब पांच हजार ट्रक किताबें भारत से आयात होती थीं। भैरहवा कस्टम चीफ कमल भटराई ने बताया कि भारतीय कॉपी-किताबों पर सरकार ने एक बिल पर 565 रुपये की जगह पूरी रकम पर दस प्रतिशत आयात ड्यूटी लगा दी है।